लखनऊ में आमोद आश्रम द्वारा होली और पारंपरिक लोकगीतों पर आधारित एक सप्ताह की कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला की मंचीय प्रस्तुति रविवार को उर्दू अकादमी के सभागार में हुई। संगीत नाटक अकादमी के निदेशक डॉ. शोभित नाहर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे। इस आयोजन में 25 से 75 वर्ष आयु वर्ग की 65 से अधिक महिलाओं ने ऑफलाइन और ऑनलाइन माध्यम से उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे सप्ताह आमोद आश्रम परिसर लोकगीतों की मधुर गूंज से जीवंत बना रहा।कार्यशाला का निर्देशन प्रख्यात लोकगायिका डॉ. सुचरिता गुप्ता ने किया। लोकगीतों की परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने की पहल डॉ. गुप्ता सुप्रसिद्ध ठुमरी गायिका सिद्धेश्वरी देवी की सुपुत्री पद्मश्री सविता देवी की शिष्या हैं। उन्होंने गुरु-परंपरा में बनारस के पूरब अंग की गायकी को आत्मसात किया है।आकाशवाणी की टॉप ग्रेड कलाकार के रूप में डॉ. सुचरिता गुप्ता लोकगीतों की परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने में सक्रिय हैं। उनका उद्देश्य नई पीढ़ी, विशेषकर बेटियों और बहुओं के माध्यम से इस सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्जीवित करना है। पारंपरिक गीतों के साथ लोकधुनों की प्रस्तुतियां दीं मंच पर प्रतिभागियों ने होली के पारंपरिक गीतों के साथ अन्य लोकधुनों की मनोहारी प्रस्तुतियां दीं। रंग, उमंग और परंपरा का यह सुंदर संगम दर्शकों को भावविभोर कर गया, जिससे सभागार तालियों की गूंज से बार-बार भर उठा।कार्यक्रम के अंत में डॉ. शोभित नाहर और डॉ. सुचरिता गुप्ता ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए। यह सांस्कृतिक आयोजन आमोद आश्रम की सचिव अनिता श्रीवास्तव, डॉ. नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव और डॉ. अनामिका श्रीवास्तव के कुशल मार्गदर्शन और सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।