अखिलेश यादव- ने कहा "भाजपा हटाओ, सनातन बचाओ!" का नारा दिया है और भाजपा पर सच्चे संतों (खासकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती) का अपमान करने का आरोप लगाया है।



यह बयान एक ताजा विवाद से जुड़ा है, जहां शंकराचार्य के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत FIR दर्ज हुई है। अखिलेश यादव का कहना है कि भाजपा सरकार झूठे आरोपों से असहमत संतों को दबा रही है, सनातन परंपराओं का उल्लंघन कर रही है, और सत्ता सिर्फ धन कमाने के लिए इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने भाजपा को "भ्रष्ट-भाजपाई" और स्वार्थी त्रिगुट बताया है।



यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है—समाजवादी पार्टी के कई हैंडल्स और समर्थकों ने इसे शेयर किया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे ABP Live, TV9 Hindi, ThePrint Hindi) में भी इसका जिक्र है, जहां अखिलेश ने कहा कि 2027 में जनता भाजपा को सत्ता से "उखाड़ फेंकेगी"।


दूसरी तरफ, भाजपा अक्सर कांग्रेस और INDIA गठबंधन पर सनातन धर्म का अपमान करने का आरोप लगाती रही है (जैसे उदयनिधि स्टालिन के बयान पर)। यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा लगता है, जहां दोनों पक्ष सनातन/हिंदू मुद्दों को चुनावी हथियार बना रहे हैं।



X पर ट्वीट 

"भाजपा हटाओ, सनातन बचाओ!


सच्चे संतों का अपमान करके भाजपा ने फिर साबित कर दिया है कि सिवाय अपनी पैसों की भूख और ख़ुदगर्ज़ी के, वो किसी की भी सगी नहीं है। भाजपाई की ये पुरानी ‘कु-कार्यशैली’ है कि जो भी भाजपाइयों के ज़ुल्म, ज़्यादती और जुर्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता है, उसे भाजपाई झूठे आरोपों से धमकाने, दबाने, मिटाने की साज़िश करते हैं। 


भ्रष्ट-भाजपाई, उनके मुख़बिर संगी-साथी और सत्ता सजातीय वाहिनी की ‘बिगड़ी-तिकड़ी’ नकारात्मकता का आपराधिक त्रिगुट है, जिसका मंसूबा धन-कमाने के लिए सत्ता हासिल करना है। ये सब के सब अपने-अपने स्वार्थ के लिए एक अड्डे पर इकट्ठा हैं वैसे ये एक-दूसरे को फूटी आँख नहीं सुहाते हैं। इनकी आपसी खटपट की भूमिगत आवाज़ें अक्सर बाहर सुनाई दे जाती हैं।"