यूपी में जनगणना- 2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं। पहली बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी, जिसमें घर-घर जाकर 33 अहम सवाल पूछे जाएंगे। ये सवाल आने वाले सालों में सड़क, पानी, आवास, स्कूल, अस्पताल और सरकारी योजनाओं के लिए बजट तय करने की बुनियाद बनेंगे। जनगणना दो चरणों में होगी। प्रदेश में जनगणना मई–जून 2026 में होनी है, जिसके लिए करीब 6 लाख कर्मियों की तैनाती की जाएगी, लेकिन हर जनगणना के साथ कुछ अहम सवाल भी खड़े होते हैं। जैसे- लोग सही जानकारी क्यों नहीं देते? क्या जनगणना में मोबाइल नंबर दर्ज कराने से टैक्स या किसी तरह की जांच का खतरा होता है? जानकारी छिपाने से आम लोग और उनके इलाके को क्या नुकसान हो सकता है, और सही जानकारी देने से क्या सीधा फायदा मिलेगा? आखिर वे 33 सवाल कौन-से हैं, जो इस बार हर घर से पूछे जाएंगे? पढ़िए इस रिपोर्ट में … जनगणना में लोग सही जानकारी क्यों नहीं देते? वरिष्ठ पत्रकार रतनमणि लाल का कहना है कि ज्यादातर लोगों को यह डर रहता है कि सही जानकारी देने से कहीं उनका नुकसान न हो जाए। उन्हें लगता है कि सरकार को पूरी जानकारी देने से वे कुछ ऐसे लाभों से वंचित हो सकते हैं, जो वे अभी ले रहे हैं। जैसे राशन कार्ड पर तय यूनिट के हिसाब से अनाज मिलता है, लेकिन कई लोग परिवार के सभी सदस्यों की सही संख्या बताने से बचते हैं। उन्हें डर रहता है कि कहीं लाभ कम न हो जाए। इसी वजह से कुछ लोग जनगणना के समय खुद को अनुपस्थित दिखाने की कोशिश भी करते हैं, ताकि उनकी गणना न हो सके। हालांकि इस बार जनगणना प्रक्रिया में यह प्रावधान किया है कि पहले दौर में अनुपस्थित पाए परिवारों तक गणनाकर्मी दोबारा पहुंचेंगे, ताकि कोई भी घर या व्यक्ति गणना से छूट न जाए। जनगणना में सही जानकारी ना देने पर नुकसान जनगणना में नाम या सही जानकारी दर्ज न कराने पर व्यक्ति या परिवार को भविष्य में सरकारी सुविधाओं से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। यदि किसी का नाम जनगणना रिकॉर्ड में शामिल नहीं होता तो प्रशासन यह मान सकता है कि वह व्यक्ति उस स्थान पर निवास नहीं करता है। ऐसी स्थिति में 2011 की पिछली जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा। कोरोना काल के दौरान जिन लोगों ने मुफ्त राशन और अन्य राहत सुविधाओं का लाभ लिया था, उनका सत्यापन भी जनगणना के आंकड़ों से किया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति या परिवार मौजूदा जनगणना में अनुपस्थित पाया जाता है, तो उसके मामलों की दोबारा रिव्यू की जा सकती है। सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ जैसे- राशन, आवास, पेंशन या अन्य सहायता, अक्सर जनगणना के आंकड़ों के आधार पर तय होता है। ऐसे में जो लोग सही जानकारी नहीं देते या खुद को गणना से बाहर रखते हैं, उन्हें भविष्य में सरकारी लाभों से वंचित होना पड़ सकता है। मोबाइल नंबर दर्ज कराने से टैक्स या किसी तरह की जांच का खतरा होता है? वरिष्ठ पत्रकार रतनमणि लाल कहते हैं, नहीं। जनगणना में मोबाइल नंबर दर्ज कराने से टैक्स या किसी तरह की जांच का कोई खतरा नहीं होता। पहले चरण में इन जिलों के मास्टर ट्रेनर्स को दी जा रही ट्रेनिंग 17 फरवरी से 20 फरवरी तक 27 जिलों के 285 मास्टर ट्रेनर्स का चार दिवसीय विशेष आवासीय प्रशिक्षण राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान लखनऊ में निदेशक शीतल वर्मा की देखरेख में कर दिया जा रहा है। ये मास्टर ट्रेनर आगे अपने-अपने जिलों में अन्य कर्मचारियों को प्रशिक्षण देंगे। दूसरे चरण में बाकी जिलों के मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण 24 से 27 फरवरी के बीच कराया जाएगा। कौन से 27 जिले शामिल? जिन 27 जिलों के मास्टर ट्रेनरों को पहले चरण में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, उनमें आगरा, अलीगढ़, अमरोहा, बागपत, गाजियाबाद, बलिया, बिजनौर, बुलंदशहर, चंदौली, देवरिया, गौतमबुद्धनगर, गाजीपुर, हापुड़, हाथरस, झांसी, ललितपुर, मथुरा, मऊ, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, रामपुर, सहारनपुर, संभल, शामली, सोनभद्र और वाराणसी शामिल हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य जनगणना कार्य को सही, समयबद्ध और व्यवस्थित तरीके से पूरा करना है, ताकि जनगणना-2027 की प्रक्रिया सुचारु रूप से संचालित की जा सके। जानिए जनगणना क्यों जरुरी है ? जनगणना देश की सबसे अहम जानकारी का सोर्स होती है। इसके जरिए पता चलता है कि देश में लोग कहां रहते हैं, कैसे रहते हैं और उन्हें किन सुविधाओं की जरूरत है। इन आंकड़ों के आधार पर सरकार नीतियां बनाती है, योजनाएं शुरू करती है और यह भी जांचती है कि पहले से चल रही योजनाएं सही ढंग से काम कर रही हैं या नहीं। जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल संसद, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व तय करने, साथ ही चुनावी क्षेत्रों के सीमांकन में भी किया जाता है। सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि बिजनेस और उद्योग जगत भी इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तय करते हैं कि उन्हें कहां निवेश करना है और अपनी सेवाएं कैसे बढ़ानी हैं। इसके अलावा वित्त आयोग भी राज्यों को मिलने वाला अनुदान जनगणना के आंकड़ों को ध्यान में रखकर तय करता है। दो फेज में होगी जनगणना केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने 8 जनवरी को बताया था कि देश में होने वाली जनगणना 2027 का पहला फेज 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच किया जाएगा। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने यहां 30 दिनों में यह काम पूरा करेंगे। सरकार ने यह भी कहा कि घरों की लिस्टिंग शुरू होने से 15 दिन पहले लोगों को खुद से जानकारी भरने (सेल्फ एन्यूमरेशन) का विकल्प भी दिया जाएगा। दरअसल जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से इसे टाल दिया था, जो अब 2027 में पूरी होगी। पहले फेज में घरों कि लिस्टिंग और घरो का डेटा इकट्ठा किया जाएगा। दूसरे फेज में आबादी की गिनती की जाएगी। पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना सरकार ने बताया कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। करीब 30 लाख कर्मचारी मोबाइल एप के जरिए जानकारी जुटाएंगे। मोबाइल एप, पोर्टल और रियल टाइम डेटा ट्रांसफर से जनगणना बहुत हद तक पेपरलेस होगी। ये ऐप Android और iOS दोनों पर काम करेंगे। जाति से जुड़ा डेटा भी डिजिटल तरीके से इकट्ठा किया जाएगा। आजादी के बाद पहली बार जनगणना में जाति की गिनती शामिल होगी। इससे पहले अंग्रेजों के समय 1931 तक जाति आधारित जनगणना हुई थी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने अप्रैल में लिया था। 2011 की पिछली जनगणना के अनुसार, भारत की आबादी करीब 121 करोड़ थी, जिसमें लगभग 51.5% पुरुष और 48.5% महिलाएं थीं। आखिरी बार 2011 में हुई थी जनगणना वरिष्ठ पत्रकार रतन मणि लाल कहते हैं कि देश में आखिरी पूरी जनगणना 2011 में हुई थी और आज भी केंद्र व राज्य सरकारों की कई योजनाएं इन्हीं आंकड़ों पर चल रही हैं। कोरोना महामारी के कारण 2021 की जनगणना नहीं हो सकी, जिससे नीतियां और बजट अब भी पुराने डेटा पर तय हो रहे हैं। 2011 की जनगणना डोर-टू-डोर और पेपर बेस्ड थी। जनगणना कर्मी घर-घर जाकर कागजी फॉर्म भरते थे, जिसके कारण डेटा तैयार होने में काफी समय लगा। इस जनगणना में सिर्फ जनसंख्या ही नहीं, बल्कि आवास, पानी, शौचालय, बिजली, शिक्षा, रोजगार और पारिवारिक संरचना से जुड़े आंकड़े जुटाए गए। इन्हीं के आधार पर सड़क, स्कूल, अस्पताल और आवास योजनाओं की जरूरत तय की गई। आज भी राशन कार्ड, पीएम आवास योजना, उज्ज्वला, स्वच्छ भारत मिशन, मनरेगा जैसी कई योजनाएं 2011 के आंकड़ों पर आधारित हैं। महिला साक्षरता, लिंगानुपात, शहरीकरण और पलायन से जुड़े आंकड़े भी इसी जनगणना से लिए जाते हैं। अगर इन 33 सवालों के जवाब नहीं दिए तो क्या होगा? जनगणना के दौरान पूछे जाने वाले ये सवाल लोगों के लिए होते हैं। लोगों का कर्तव्य है कि वो इन सवालों का जवाब दें, ताकि सरकार को सही तस्वीर मिले। ताकि भविष्य की योजनाओं में उन कमियों को दूर किया जा सके। जिनका सामना लोग कर रहे हैं। नागरिकता का इससे कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन जनगणना में न केवल बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेना चाहिए बल्कि सही जानकारी भी देना चाहिए। ………….. ये खबर भी पढ़ें… सोना महंगा-वजन हल्का, बढ़ते दामों ने बदली खरीदारी की आदतें:पुराना जेवर बदलकर चला रहे काम; व्यापारी बोले- अप्रैल से बढ़ेगा कारोबार सोने-चांदी के दामों में जारी उतार-चढ़ाव का असर अब सीधे सर्राफा बाजार पर दिखाई देने लगा है। रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचते दामों ने न सिर्फ कस्टमर का बजट बदला, पसंद भी बदल गई। जहां पहले भारी और पारंपरिक गहनों की मांग रहती थी, वहीं अब ग्राहक हल्के डिजाइन और कम वजन की ज्वेलरी को तरजीह दे रहे। पढ़िए पूरी खबर…