लखनऊ में एटीएस इंस्पेक्टर बताकर एक दंपती से 90 लाख रुपए की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग में फंसाने की धमकी देकर दंपती को बंधक बना लिया और 12 दिनों में आरटीजीएस के जरिए रकम ट्रांसफर करा ली। आरोपी 3 प्रतिशत कमीशन पर एकाउंट उपलब्ध कराते थे। डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया कि 26 जनवरी 2026 को आलमबाग निवासी राकेश बाजपेई की पत्नी वीना बाजपेई के मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को एटीएस मुख्यालय में तैनात इंस्पेक्टर रंजीत कुमार बताया। उसने आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप लगाकर गिरफ्तारी की धमकी दी। इसके बाद सिग्नल ऐप डाउनलोड कराया गया। जहां अजय प्रताप श्रीवास्तव नाम के व्यक्ति ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर संपर्क किया। आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश और सीजर दस्तावेज दिखाकर कहा कि गिरफ्तारी से बचने और खातों की जांच के लिए दूसरे खातों में ट्रांसफर करनी होगी। दबाव में आकर दंपती ने 29 जनवरी से 9 फरवरी के बीच अलग-अलग खातों में करीब 90 लाख रुपए भेज दिए। बाद में 11 लाख रुपए और मांगे गए। मना करने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई। तब ठगी की जानकारी हुई। घटना के खुलासा के लिए टीम लगी थी। टीम ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान पिपराइच गोरखपुर निवासी मयंक श्रीवास्तव (24), निवाड़ी गाजियाबाद निवासी इरशाद (23), प्रेम नगर मुंडका दिल्ली निवासी मनीष उर्फ आकाश (24) के रूप में हुई। दिल्ली-नोएडा से संचालित हो रहा था नेटवर्क पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी मयंक श्रीवास्तव ने बताया कि आर्थिक तंगी के चलते इरशाद के संपर्क में आया। इरशाद ने कमीशन का लालच देकर उसका बैंक खाता इस्तेमाल किया। 7 फरवरी को उसे दिल्ली बुलाकर पहाड़गंज के एक होटल में ठहराया गया। वहां उसकी मुलाकात इरशाद, आकाश उर्फ मनीष और जीतू उर्फ जीतेन्द्र से कराई गई। मयंक के मोबाइल का पासवर्ड लेकर उसके जरिए साइबर फ्रॉड के करोड़ों रुपए के लेन-देन किए गए। उसे 10 हजार रुपए नगद दिए गए और दो लाख रुपए देने का वादा किया गया। उसकी आईसीआईसीआई और एचडीएफसी बैंक की चेकबुक व डेबिट कार्ड भी ले लिए गए। 3% कमीशन पर काम करता था गिरोह इरशाद ने पूछताछ में बताया कि वह 3% कमीशन पर आकाश उर्फ मनीष और जीतू उर्फ जीतेन्द्र के लिए एकाउंट होल्डर को फंसाता था। व्हाट्सएप कॉल से संपर्क रखता था और बैंक खाते, चेकबुक व डेबिट कार्ड जुटाता था। आकाश उर्फ मनीष ने भी 3% कमीशन पर काम करने की बात स्वीकार की। मयंक की दोनों चेकबुक और डेबिट कार्ड उसके कब्जे से बरामद हुए हैं। 1.06 करोड़ की रकम खाते में आई डीसीपी क्राइम ने बताया 9 फरवरी 2026 को मयंक के खाते में 1 करोड़ 6 लाख 30 हजार रुपए आए थे। एनसीसीआरपी पोर्टल पर जांच में तमिलनाडु समेत कई राज्यों से संबंधित शिकायतें दर्ज मिली हैं। उनसे संपर्क किया जा रहा है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।