प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरा नंद सरस्वती और उनके बटुक शिष्यों के साथ हुई घटना के बाद, अब कई संगठनों ने बटुकों के सम्मान के लिए पहल की है। इसी क्रम में, झूंसी स्थित तपोवन आश्रम में आचार्य हरि कृष्ण शुक्ला ने 200 बाल बटुकों को भोजन कराया और उन्हें सम्मानित किया। यह कदम उपमुख्यमंत्री के बयान और सामाजिक प्रतिक्रियाओं के बाद उठाया गया। आचार्य हरि कृष्ण शुक्ला ने इस अवसर पर कहा कि ये बाल बटुक सनातन धर्म के प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि संगम की धरती पर हुए अपमान से हिंदू समाज और सनातन से जुड़े लोग आहत हैं। इसी आत्मग्लानि और सामाजिक जिम्मेदारी के तहत आश्रम में बटुकों का सम्मान कर उनका आशीर्वाद लिया गया। उन्होंने बच्चों को समाज में उचित मान-सम्मान देने को कर्तव्य बताया। कार्यक्रम में पावन प्रयाग फाउंडेशन के अध्यक्ष विष्णु कांत पांडेय ने भी इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि बटुकों के सम्मान से न केवल उनकी गरिमा बढ़ती है, बल्कि समाज में धर्म और संस्कृति के प्रति संवेदनशीलता भी जागृत होती है। आचार्य शुक्ला ने आगे कहा कि बच्चों के साथ होने वाले अपमान की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने इसके खिलाफ सामूहिक सामाजिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने युवाओं और धार्मिक संस्थाओं से बच्चों के अधिकारों और सम्मान के लिए आगे आने की अपील की। इस अवसर पर बटुकों को भोजन के साथ-साथ विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों में भी शामिल किया गया। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना जगाने का एक प्रयास है। गौरतलब है कि पिछले दिनों माघ मेले में बटुकों के साथ हुई घटना ने समाज में गहरी हलचल मचा दी थी। ऐसे में प्रयागराज में आयोजित यह कार्यक्रम बच्चों के आत्मसम्मान और सनातन धर्म के प्रतीकों की गरिमा को बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।