कानपुर देहात। राजस्थान के कोटा में हुए सड़क हादसे में जान गंवाने वाले रूरा कस्बे के तीन युवकों—श्रेष्ठ बाजपेई, प्रांजुल चतुर्वेदी और अंकुश दुबे—को मंगलवार को अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान पूरा कस्बा गमगीन रहा और जनसैलाब उमड़ पड़ा। रविवार को कोटा में हुए भीषण सड़क हादसे ने रूरा के तीन परिवारों की खुशियां छीन ली थीं। जैसे ही तीनों युवकों के पार्थिव शरीर कस्बे में पहुंचे, माहौल चीख-पुकार और करुण क्रंदन से भर उठा। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। अंतिम यात्रा जब घरों से निकली तो ऐसा लगा मानो पूरा रूरा उनके साथ चल पड़ा हो। बड़ी संख्या में युवा अपने दोस्तों को कंधा दे रहे थे। 'राम नाम सत्य है' के जयघोष के बीच हर चेहरा गम में डूबा था। बाजार स्वेच्छा से बंद रहे और लोगों ने पुष्प वर्षा कर अपने लाडलों को श्रद्धांजलि दी। स्थानीय लोगों ने बताया कि तीनों युवक मिलनसार और हंसमुख स्वभाव के थे। किसी ने सोचा भी नहीं था कि रोजी-रोटी की तलाश में घर से निकले ये बेटे यूं असमय काल का ग्रास बन जाएंगे। जैसे ही श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई, वहां मौजूद लोगों की आंखों से आंसू बह निकले। परिजन बेसुध होकर गिर पड़ते, जिन्हें आसपास के लोग संभालते नजर आए। पूरा वातावरण शोक और स्तब्धता से भरा रहा। रूरा कस्बे में अब भी सन्नाटा पसरा है। हर गली, हर मोड़ पर बस एक ही चर्चा है—तीन जिंदगियां जो कल तक हंसती-खिलखिलाती थीं, आज यादों में बदल गईं।