कानपुर में मामूली फोड़े के ऑपरेशन के दौरान एक बच्ची की मौत हो गई। परिवार के लोगों ने हॉस्पिटल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। उनका आरोप है कि ऑपरेशन के बाद डॉक्टर लापता हो गए। हम लोग रोते रहे, गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन डॉक्टर नहीं पहुंचे। हॉस्पिटल में कोई भी ड्यूटी डॉक्टर नहीं था। जब तक डॉक्टर पहुंचे बच्ची ने दम तोड़ दिया। परिवार के लोगों ने हॉस्पिटल संचाल के खिलाफ रावतपुर थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। यह घटना रावतपुर में नमक फैक्ट्री चौराहा पर देव ऑर्थोपेडिक हॉस्पिटल की है। अब विस्तार से जानिए पूरा मामला… बर्रा-8 सी-ब्लॉक मकान नंबर 289 में रहने वाले राहुल सिंह ने बताया कि उनकी 9 साल की बेटी आरूषी के पैर में फोड़ा था। उन्होंने नमक फैक्ट्री चौराहा स्थित देव ऑर्थोपेडिक सेंटर हॉस्पिटल के डॉक्टर टीपी सिंह को दिखया था। डॉक्टर ने पैर में मवाज पड़ने की वजह से छोटा सा ऑपरेशन कराने की सलाह दी और 21 फरवरी की दोपहर 1:30 बजे आरुषी को एडमिट करा दिया। इसके अलगे दिन 22 फरवरी को दोपहर करीब 1:20 बजे बेटी के पैर का ऑपरेशन किया। पिता राहुल ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन के बाद ही बच्ची की तबियत बिगड़ गई थी। हॉस्पिटल में कोई ड्यूटी डॉक्टर मौजूद नहीं था, परिवार के लोग गिड़गिड़ाते रहे। ऑपरेशन करने वाले डॉ. टीपी सिंह को बुलाने की मिन्नत करते रहे, लेकिन किसी ने एक नहीं सुना। बच्ची की हालत बिगड़ती चली गई और करीब 4 घंटे बाद डॉ. टीपी सिंह पहुंचे तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बच्ची ने अपनी मां दीपिका की गोद में तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। पिता राहुल ने बताया कि वह भी रोते हुए हाॅस्पिटल स्टाफ के आगे-पीछे दौड़ते रहे मिन्नतें करते रहे लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी। आरोप है कि बच्ची की मौत के बाद हॉस्पिटल के डॉक्टर और स्टाफ वहां से भाग निकला। परिवार के लोगों ने रावतपुर थाने में मामले की जानकारी दी। सूचना पर पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची और जांच के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और सीएमओ की जांच रिपोर्ट के बाद मामले में कार्रवाई की जाएगी। बच्ची के मामा अभय सिंह ने बताया कि बच्ची के पैर ज्वाइंट के पास पस था। डॉक्टर टीपी सिंह ने नॉर्मल ऑपरेशन करने की बात कही थी। रविवार को दोपहर में ऑपरेशन के बाद वह ऑपरेशन थिएटर से बाहर निकली तब ही उसकी हालत गंभीर थी। स्टाफ नर्स ने कॉल करके डॉक्टर टीपी सिंह को बताया कि बच्ची की हालत गंभीर है, इसके बाद भी डॉक्टर नहीं पहुंचे। कॉल करने के करीब आधा घंटे बाद डॉक्टर पहुंचे, लेकिन तब तक बच्ची की मौत हो गई थी। हॉस्पिटल में कोई भी इंतजाम नहीं है। हॉस्पिटल में आईसीयू नहीं है, बच्ची ने टॉयलेट कर दी तो उसे साफ करने वाला कोई नहीं था। बच्ची का बीपी और पल्स चेक करने का भी कोई प्रबंध नहीं था। बिटिया की हालत गंभीर होने पर डॉक्टर पहुंचे, लेकिन तब तक उसकी मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि शाम 6 बजे के बाद ही दवा देंगे, लेकिन उसकी मौत हो गई। बेटी की मौत से परिवार में मचा कोहराम दंपति दीपिका और राहुल की इकलौती बेटी 9 साल की अरुषि और 7 साल का बेटा अरुष है। राहुल ने बताया कि वह प्राइवेट जॉब करके अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। हॉस्पिटल प्रबंधन ने ऑपरेशन के नाम पर पहले ही 35 हजार रुपए और दवा के नाम पर 26 हजार रुपए जमा कराए थे। 61 हजार रुपए एडवांस में जमा कराने के बाद भी हंसते-खेलते अस्पताल गई बच्ची की लाश हमें वापस मिली। इस तरह के डॉक्टरों और अस्पताल संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। ------------- बेटी के पैर में पस पड़ने पर लाए थे हॉस्पिटल बर्रा थाना क्षेत्र के मेहरबान सिंह का पुरवा निवासी राहुल सिंह की (10) साल की बेटी आरूषि के पैर में पस पड़ गया था। पैर में दर्द की शिकायत पर पिता ने आरूषि को शनिवार दोपहर रावतपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। वहां उसका उपचार चल रहा था। देर रात अचानक बेटी की अचानक हालत बिगड़ गई। रविवार देर रात को को इलाज के दौरान बेटी की मौत हो गई। डॉक्टरों ने कहा की बेटी की हालत बिगड़ गई है। दूसरे हॉस्पिटल ले जाओ जहां से उसे काकादेव के एक निजी हॉस्पिटल लेकर गए। वहां देखते ही डॉक्टरों ने बेटी को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद गुस्साए परिजनों ने गलत इलाज का आरोप लगाकर जमकर हंगामा काटा। हंगामा बढ़ता देख हॉस्पिटल के कर्मचारियों ने 112 नंबर डायल कर सूचना पुलिस को दी। जानकारी मिलते ही रावतपुर थाने का फ़ोर्स मौके पर पहुंचा। हंगामा काट रहे परिजनों को कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया। थाना प्रभारी बोले- रावतपुर थाना प्रभारी कमलेश कुमार रॉय ने बताया कि पीड़ित पक्ष की ओर से तहरीर मिली है। सीएमओ को एक रिपोर्ट भेज कर मामले की जांच की जा रही है।