बिधनू कठेरुआ स्थित कष्टभंजन हनुमत सत्य सिद्ध आश्रम धाम में रविवार देर शाम वृंदावन धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में महर्षि याज्ञवल्कय जयंती का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वस्ति वाचन और राम नाम संकीर्तन से हुआ, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस अवसर पर 21 वेदपाठी ब्राह्मणों एवं पांच बटुकों का सम्मान किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वेदपाठी ब्राह्मणों का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। ट्रस्ट के संस्थापक चन्द्रेश महाराज चन्द्रदास ने महर्षि याज्ञवल्कय को सनातन धर्म का रक्षक तथा शुक्ल यजुर्वेद का प्रवर्तक बताया। उन्होंने कहा कि ब्रह्मर्षि याज्ञवल्कय ने शतपथ ब्राह्मण की रचना की और याज्ञवल्क्य स्मृति का निर्माण कर धर्मशास्त्रों को समृद्ध किया। ट्रस्ट अध्यक्ष उमेश चन्द्र शुक्ल ने अपने संबोधन में कहा कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार याज्ञवल्कय को ब्रह्माजी का अवतार भी माना जाता है तथा उन्हें ब्रह्मनिष्ठ की उपाधि प्राप्त थी। कार्यक्रम के समापन पर कष्टभंजन हनुमान जी की आरती एवं भजन-कीर्तन हुआ, जिसके पश्चात माता अन्नपूर्णा का प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर अमियभूषण शुक्ल, अमित द्विवेदी, विद्यानंद पांडेय, रमाकांत त्रिपाठी, कल्याण तिवारी, तनय पांडेय एवं ब्रह्मदत्त द्विवेदी सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।