गोरखपुर के अभियान थिएटर ने नेशनल थिएटर फेस्टिवल में हिस्सा लिया। जिसका आयोजन मध्य प्रदेश के सागर जिले में किया गया। इस दौरान अभियान ग्रुप ने नाटक 'महारथी' की शानदार प्रस्तुति से दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। लगभग 90 मिनट तक चली यह प्रस्तुति दानवीर कर्ण के जीवन के माध्यम से समाज में फैले भेदभाव और जातिवाद पर कड़े सवाल उठाता है। इस नाटक को विभांशु वैभव ने लिखा है, जबकि निर्देशन श्रीनारायण पांडेय ने की है। कर्ण को प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लेने दिया नाटक की शुरुआत द्रोणाचार्य के उस फैसले से होती है, जिसमें उन्होंने कर्ण को उसकी जाति की वजह से प्रतियोगिता में हिस्सा लेने से मना कर दिया था। लेखक ने पौराणिक कहानी को आज के दौर से जोड़कर दिखाया है कि कैसे आज भी काबिलियत से ज्यादा जाति को महत्व दिया जाता है। मनीष ने कर्ण के किरदार में जान डाली कलाकार मनीष ने कर्ण के किरदार में जान डाल दी। जब वे भगवान कृष्ण और कुंती से अपनी पहचान को लेकर सवाल पूछते हैं, तो दर्शक भावुक हो गए। उनके अभिनय में गुस्सा और स्वाभिमान साफ दिख रहा था। वहीं कृष्ण के रूप में आदर्श ने बहुत ही शांत और गंभीर अभिनय किया। उनकी डायलॉग डिलीवरी और लुक कमाल का था। जबकि सुमितेन्द्र ने दुर्योधन के रोल में बहुत जोश दिखाया। द्रोणाचार्य (राहुल सिंह) और उनके बीच की बहस ने दर्शकों को बांधे रखा। इसके अलावा कुंती के रूप में रितिका गुप्ता, वृषाली के रूप में कनक कुमारी और द्रौपदी के रूप में गर्विता राय ने बहुत ही इमोशनल और दमदार एक्टिंग की। अर्जुन, भीम, युधिष्ठिर समेत बाकी सभी कलाकारों ने भी अपना काम बखूबी निभाया। मंच और संगीत नाटक की लाइटिंग (विशाल गुप्ता) और बैकग्राउंड म्यूजिक (गर्विता और रितिका) ने माहौल को और भी असरदार बना दिया। कर्ण के दुख भरे दृश्यों में संगीत ने दर्शकों को गहराई तक महसूस कराया। कपड़ों और मेकअप ने पात्रों को बिल्कुल असली जैसा बना दिया था।