Advertisement
Sponsored
गोरखपुर में विद्युत कर्मचारी समिति ने टेंडर का विरोध किया:निजी कंपनियों को जल विद्युत परियोजनाएं देने पर निरस्त करने की मांग
Feb 22, 2026
गोरखपुर में 6 लघु जल विद्युत परियोजनाओं को 42 साल की अवधि के लिए निजी कंपनियों को लीज पर देने के लिए जारी टेंडर का विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने विरोध किया है। समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप कर टेंडर को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम ने 18 फरवरी को टेंडर जारी किया है। टेंडर की शर्तों के अनुसार निजी कंपनियां 1.5 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट की अग्रिम प्रीमियम राशि देकर परियोजनाओं का 42 साल तक संचालन और नियंत्रण प्राप्त करेंगी। 6 जल विद्युत गृह शामिल टेंडर में भोला (2.7 मेगावाट), सलावा (3 मेगावाट), निर्गजनी (5 मेगावाट), चित्तौड़ा (3 मेगावाट), पालड़ा (0.6 मेगावाट) और सुमेरा (1.5 मेगावाट) जल विद्युत गृह शामिल हैं। ये सभी परियोजनाएं अपर गंगा नहर पर स्थापित हैं और करीब 90 से 97 साल पुरानी हैं। संघर्ष समिति का कहना है कि अपर गंगा नहर में सालभर पानी उपलब्ध रहने से इन परियोजनाओं से पूरे साल बिजली उत्पादन संभव है। सीमित निवेश से इनका पुनर्जीवन और आधुनिकीकरण किया जा सकता है और खर्च एक साल के उत्पादन से ही वसूल हो सकता है। क्षमता कम दिखाने का आरोप समिति ने आरोप लगाया कि टेंडर में कुल स्थापित क्षमता 15.5 मेगावाट के बजाय 6.3 मेगावाट दर्शाई गई है, जिससे करीब 10 करोड़ रुपये में राज्य की महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों को निजी क्षेत्र को सौंपने की तैयारी की जा रही है। समिति का कहना है कि परियोजनाएं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऐसे क्षेत्रों में हैं जहां जमीन का मूल्य अधिक है और परियोजनाओं में पर्याप्त भूमि शामिल है। संघर्ष समिति ने आशंका जताई कि 42 साल की अवधि में निजी कंपनियां बिजली उत्पादन के साथ परियोजनाओं से जुड़ी जमीन का व्यावसायिक उपयोग भी कर सकती हैं और इतनी लंबी अवधि के बाद परिसंपत्तियों की मूल स्थिति में वापसी संदिग्ध हो सकती है। निजीकरण को बढ़ावा देने का आरोप समिति ने पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन पर निजीकरण को बढ़ावा देने और सार्वजनिक संपत्तियों को कम मूल्य पर हस्तांतरित करने की मंशा का आरोप लगाया है और इसे प्रदेश के आर्थिक हितों के खिलाफ बताया है। संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से सार्वजनिक संपत्तियों और जनहित की रक्षा के लिए टेंडर को तत्काल निरस्त करने तथा परियोजनाओं के पुनर्निर्माण, नवीनीकरण और आधुनिकीकरण का काम सरकारी स्तर पर कराने की मांग की है।
Advertisement
Advertisement
Readers Comments