गोरखपुर में 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर TET परीक्षा लागू करने के विरोध में शिक्षकों ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक व्यापक अभियान चलाया। शिक्षकों ने केंद्र सरकार से इस नियम को हटाने और अध्यादेश लाने की मांग की। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा, उत्तर प्रदेश जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश त्यागी और उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना मौर्य के आह्वान पर यह अभियान दोपहर 2 बजे शुरू हुआ। देर शाम तक जारी रहे इस अभियान में शिक्षकों ने #JusticeForTeachers हैशटैग का उपयोग कर अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया। शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों ने दावा किया कि यह अभियान शाम साढ़े चार बजे के बाद भी सोशल मीडिया पर नंबर एक पर ट्रेंड करता रहा। यह स्थिति देश और प्रदेश के शिक्षकों में इस मुद्दे को लेकर व्यापक समर्थन और असंतोष का संकेत देती है। अभियान के माध्यम से शिक्षकों ने केंद्र सरकार से मांग की कि 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर TET परीक्षा लागू करने के नियम को तत्काल हटाया जाए। उन्होंने अध्यादेश लाकर स्थिति स्पष्ट करने की अपील की। शिक्षकों का तर्क है कि नियुक्ति के समय जो नियम लागू थे, उन्हीं के आधार पर सेवा शर्तें निर्धारित होनी चाहिए, और बाद में नियम लागू करना न्यायसंगत नहीं है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के मंडलीय मंत्री ज्ञानेंद्र ओझा ने कहा कि हैशटैग का नंबर एक पर ट्रेंड करना यह दर्शाता है कि देश और प्रदेश के प्राथमिक शिक्षक इस मांग को लेकर पूरी तरह एकजुट हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो आगामी दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक आंदोलन की स्थिति बनी रहने से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। जिलाध्यक्ष राजेश धर दूबे, जूनियर संघ के अध्यक्ष संजीव राय और महिला संघ की आकांक्षा सिंह ने बताया कि आंदोलन के अगले चरण में 23 से 25 फरवरी तक सभी शिक्षक काली पट्टी बांधकर अपने-अपने कार्यस्थलों पर काम करते हुए विरोध दर्ज कराएंगे। कामकाज जारी रखते हुए विरोध इस दौरान शिक्षक विद्यालयों में नियमित शिक्षण कार्य, बोर्ड परीक्षा ड्यूटी और बीएलओ का कार्य भी करते रहेंगे, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो, लेकिन सरकार तक अपनी बात भी मजबूती से पहुंचाई जा सके। शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आगे की रणनीति तय कर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने सभी शिक्षकों से एकजुट रहकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने की अपील की है।