निवेश पर कम समय में मोटा मुनाफा होने का झांसा देकर साइबर जालसाजों ने एक आर्किटेक्ट के साथ 64 लाख 59 हजार रुपए की ठगी कर ली। 20 से अधिक बार में खाते में रकम ट्रांसफर कराई। इस मामले में पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज कराया है। जिन खातों में ठगी की रकम गई है पुलिस उन खातों की जांच करने में जुट गई है। सेक्टर 58 के रजत बिहार निवासी 57 साल के पीड़त ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि बीते साल नवंबर के पहले सप्ताह में उन्हें वाट्सऐप पर विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) ट्रेडिंग से जुड़ा बिजनेस ऑफर मिला। खुद को आशी अग्रवाल बताने वाली महिला ने संपर्क किया और एक वेबसाइट के जरिए पांच से 20 मिनट की शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का भरोसा दिया। पहले दिखा मुनाफा शुरुआत में वेबसाइट के डैशबोर्ड पर मुनाफा दिखाया गया, जिससे उनका भरोसा बढ़ता गया। इसके बाद उन्हें बार-बार अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने को कहा गया। हर ट्रांजैक्शन से पहले नया खाता नंबर दिया जाता और 30 मिनट बाद राशि जमा करने को कहा जाता था। 26 नवंबर 2025 से 11 फरवरी 2026 के बीच पीड़ित ने अपनी बचत, फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड तक तोड़कर कुल 64.59 लाख ट्रांसफर किए। पैसा निकालने के लिए जमा करे 13 लाख जब उन्होंने पैसा निकालने की कोशिश की तो उनसे कहा गया कि निकासी के लिए 10 से 13 लाख रुपये और जमा करने होंगे। कई अन्य शर्तों का भी पालन करना होगा। पीड़ित ने जब और रकम ट्रांसफर करने से इनकार किया तो उसे निवेश की हुई रकम भी न मिलने की धमकी दी गई। बाद में जांच में सामने आया कि वेबसाइट पर दिखाया गया मुनाफा पूरी तरह फर्जी था और निकासी जानबूझकर रोकी जा रही थी। संगठित तरीके से करते ठगी शिकायत में पीड़ित की ओर से यह भी बताया गया है कि आरोपी ने बेंगलुरु का पता दिया, लेकिन पीड़ित ने कभी इन पतों की पुष्टि नहीं की। ठग बेहद संगठित तरीके से काम कर रहे थे और आधिकारिक पहचान साझा करने से बचते रहे। मामला सामने आने के बाद साइबर क्राइम थाने में आईटी एक्ट और संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।