गोरखपुर में बिना पैसा दिए बैनामा कराने का मामला सामने आया है। पीड़ित की ओर से इसकी शिकायत भी की गई है। जिसने बैनामा कराया, उसने 6 चेकों के माध्यम से 30 लाख रुपये दिए थे लेकिन सभी चेक जब बैंक पहुंचे तो बाउंस हो गए। इस तरह डीड का पालन न करने पर पीड़ित ने बैनामा शून्य करने के लिए वाद दाखिल किया। इसका नामांतरण यानी दाखिल-खारिज न होने पाए, इसक लिए नायब तहसीलदार के यहां आपत्ति भी दाखिल की लेकिन आम धारणा से विपरीत जाते हुए नायब तहसीलदर ने नामांतरण कर दिया। अब इस मामले की शिकायत शासन में की गई है। शासन ने डीएम को जांच कराने का आदेश दिया है। पैसा लेकर जमीन बेचने की बात तय होती है और उसी के आधार पर रजिस्ट्री होती है। यही डील रेनू गुप्ता के साथ भी हुई थी। रजिस्ट्री के दौरान चेक से 30 लाख रुपये भुगतान का डीड बना। बैनामा करा लिया गया लेकिन जब चेक भुनाने की बात आयी तो सभी चेक बाउंस हो गए। मामला सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम जंगल रामगढ़ उर्फ चवरी स्थित 5600 वर्ग फीट जमीन का है। इस मामले में पीड़ित रेनू गुप्ता ने धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। पहले जानिए क्या है मामला पीड़िता रेनू गुप्ता का आरोप है कि अरुण कुमार मिश्र नामक व्यक्ति ने 30 लाख रुपये में जमीन खरीदने का सौदा तय किया और 28 मार्च 2023 को यूनियन बैंक आफ इंडिया के छह चेक (प्रत्येक 5 लाख रुपये) देकर बैनामा करा लिया। लेकिन सभी चेक बाउंस हो गए। संबंधित खाते में धनराशि न होने के कारण सभी चेक बाउंस हो गए। आरोप है कि आरोपी लगातार भुगतान का आश्वासन देता रहा, जिससे चेक प्रस्तुत करने की वैध समयावधि भी समाप्त हो गई। इसके बाद जून 2025 में आरोपी ने भारतीय स्टेट बैंक के दो और चेक (15-15 लाख रुपये) दिए, लेकिन वे भी खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण बाउंस हो गए। जिसके बाद पीड़िता ने शिकायत की। नामांतरण करने वाले अधिकारी पर भी आरोप इस मामले में पीड़िता ने नामांतरण करने वाले अधिकारी पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की शिकायत प्रमुख सचिव राजस्व परिषद से की है। आरोप है कि हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की गाइडलाइन होने के बाद भी नायब तहसीलदार ने नामांतरण कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त सचिव ओम प्रकाश पाण्डेय ने 23 फरवरी 2026 को जिलाधिकारी को पत्र भेजकर प्रकरण में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करते हुए विस्तृत आख्या शासन को उपलब्ध कराने को कहा है। पीड़िता रेनू गुप्ता का कहना है कि उन्हें जमीन के बदले एक रुपया भी प्राप्त नहीं हुआ है और इस संबंध में दीवानी न्यायालय में वाद विचाराधीन है। उनका दावा है कि उन्होंने बाउंस चेक की प्रतियां, बैंक स्टेटमेंट और अन्य साक्ष्य नायब तहसीलदार के पास प्रस्तुत कर यह आपत्ति दर्ज कराई थी कि बिना प्रतिफल भुगतान के नामांतरण नहीं हो सकता। उन्होंने उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के निर्णयों का भी हवाला दिया, जिनमें स्पष्ट किया गया है कि यदि बिक्री विलेख का प्रतिफल अदा नहीं हुआ हो तो विवाद की स्थिति में नामांतरण पर विचार किया जाना चाहिए। इसके बावजूद नामांतरण आदेश पारित कर दिया गया। डीएम ने कहा जांच कराएंगे इस मामले में डीएम दीपक मीणा ने कहा कि मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसी शिकायत हुई है तो इसकी जांच कराएंगे। जो दोषी मिलेगा उसपर कार्रवाई होगी। नामांतरण का आदेश देने वाले अधिकारी ने बताया कि जबतक दिवानी कोर्ट से बैनामा निरस्त नहीं हो जाता, तबतक नामांतरण नहीं रोका जाता। विक्रय पत्र होने पर नामांतरण कर दिया जाता है। इस मामले में भी कोई रोक नहीं थी।
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