मथुरा रिफाइनरी में संभावित औद्योगिक खतरों से निपटने की तैयारियों का आकलन करने के लिए एक ऑन-साइट कम ऑफ-साइट आपातकालीन पूर्वाभ्यास आयोजित किया गया। यह मॉक ड्रिल प्रोपिलीन गैस के काल्पनिक रिसाव और उससे उत्पन्न आग की स्थिति पर आधारित थी। रिफाइनरी प्रबंधन ने प्लांट परिसर और आसपास के गांवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह अभ्यास किया। अभ्यास के दौरान, जैसे ही गैस रिसाव और आग लगने की सूचना मिली, रिफाइनरी का अग्निशमन दस्ता तुरंत सक्रिय हो गया। फायर टेंडरों के साथ टीम घटनास्थल पर पहुंची और आग बुझाने की कार्रवाई शुरू की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इसे आपदा घोषित किया गया, जिसके बाद जिला प्रशासन की विभिन्न एजेंसियां भी हरकत में आ गईं। घटनास्थल पर जिला प्रशासन, सिविल डिफेंस, जिला अस्पताल, जिला अग्निशमन विभाग और पुलिस विभाग की टीमें पहुंचीं। सभी विभागों ने मिलकर 20 मिनट में आग बुझाने, राहत एवं बचाव कार्य करने और निकासी (इवैकुएशन) प्रक्रिया को अंजाम दिया। इस पूर्वाभ्यास के दौरान सुरक्षा मानकों, संचार व्यवस्था और विभिन्न एजेंसियों के आपसी तालमेल का भी परीक्षण किया गया। पूर्वाभ्यास के बाद एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता रिफाइनरी के कार्यकारी निदेशक और प्रमुख मुकुल अग्रवाल ने की। बैठक में जिला प्रशासन, सीआईएसएफ और रिफाइनरी प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। पर्यवेक्षकों ने ड्रिल के विभिन्न चरणों पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की और सुधार के संभावित बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। रिफाइनरी प्रबंधन ने बताया कि इस तरह के नियमित पूर्वाभ्यास आपातकालीन स्थितियों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने में सहायक होते हैं। इससे कर्मचारियों और आसपास के क्षेत्रों की सुरक्षा मजबूत होती है।