घर में घुसकर मारपीट के मामले में सीनियर एडवोकेट अख्तर अली ने मंगवार को बरेली एसएसपी अनुराग आर्य से न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने जामा मस्जिद के इमाम पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि 22 फरवरी की शाम करीब 5 बजे वे अपने घर पर चेंबर में कानूनी काम कर रहे थे। तभी जामा मस्जिद के मौलाना खुर्शीद के इशारे पर 50 से अधिक उपद्रवियों ने घर में घुसकर हमला कर दिया। हमलावरों ने गालियां देते हुए उनकी गर्दन दबाकर जान लेने की कोशिश की। दफ्तर की महत्वपूर्ण फाइलें फाड़ दीं और उनमें आग लगाने का प्रयास भी किया। एडवोकेट अख्तर अली ने सोमवार देर रात जामा मस्जिद के मौलाना खुर्शीद और उनके समर्थकों पर मुकदमा दर्ज कराया था। मामले में अभी तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। ‘मौलाना के पीछे नमाज पढ़ो वरना मार देंगे’ हाफिजगंज थाना क्षेत्र के सेंथल निवासी वकील अख्तर अली का बताया, हमलावरों ने उन्हें धमकाते हुए पूछा कि तुम जामा मस्जिद जाकर मौलाना खुर्शीद के पीछे नमाज अदा क्यों नहीं करते? भीड़ ने उन्हें चेतावनी दी कि अगर भविष्य में मस्जिद जाकर नमाज नहीं पढ़ी, तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा। घटना के बाद से पीड़ित वकील और उनका पूरा परिवार खौफ में है। उन्होंने मामले की शिकायत हाफिजगंज थाने में दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी वारदात के बाद भी पुलिस ने अब तक किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया। इबादत पर पहरा मंजूर नहीं: एडवोकेट दैनिक भास्कर से बातचीत में अख्तर अली ने कहा, “अल्लाह की इबादत के लिए किसी खास जगह की पाबंदी नहीं है, इबादत तो कहीं भी की जा सकती है। मैं जहां होता हूं, वहीं नमाज अदा कर लेता हूं।” उन्होंने मौलाना खुर्शीद पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मौलाना क्रिमिनल बैकग्राउंड का है और उन पर कई मुकदमे दर्ज हैं। वकील के मुताबिक, मौलाना को सही ढंग से नमाज पढ़ाना भी नहीं आता। इसी वजह से सेंथल कस्बे के करीब 70% लोग उनके पीछे नमाज पढ़ना पसंद नहीं करते। पुलिस कार्रवाई का इंतजार जामा मस्जिद के मौलाना खुर्शीद और उनके समर्थकों पर मुकदमा तो दर्ज हो गया है। पीड़ित का कहना है कि उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि वे मौलाना के पीछे ही नमाज अदा करें। यह उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है।