प्रयागराज में रमजान की शुरुआत के साथ ही बाजारों में रौनक बढ़ गई है। खास तौर पर यहां की मशहूर सूतफेनी की मांग रोजे के महीने में तेजी से बढ़ जाती है। इफ्तार की थाली में शामिल होने वाली यह खास मिठाई न सिर्फ स्वाद के लिए जानी जाती है, बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल भी पेश करती है। सूतफेनी बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि इसकी तैयारी रमजान से कई दिन पहले ही शुरू हो जाती है। महीन धागों जैसी दिखने वाली यह सेवई बनाना आसान काम नहीं है। इसमें काफी मेहनत और बारीकी लगती है। रमजान और ईद के दौरान इसकी डिमांड इतनी बढ़ जाती है कि कारीगरों को दिन-रात काम करना पड़ता है। स्थानीय बाजारों के साथ-साथ यह सूतफेनी देश के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों तक भी भेजी जाती है। कारीगर बताते हैं कि प्रयागराज की सूतफेनी की खासियत यहां का पानी है। मान्यता है कि गंगा और जमुना के पानी से तैयार होने के कारण इसका स्वाद अलग और मीठा होता है। यही वजह है कि लोग इसे खास तौर पर खरीदना पसंद करते हैं। दुकानदारों के अनुसार, रोजे के दौरान इसकी बिक्री कई गुना बढ़ जाती है। उनका कहना है कि सूतफेनी खाने से शरीर में ठंडक बनी रहती है, इसलिए इफ्तार में इसे खास महत्व दिया जाता है। खरीदारों में भी इसे लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है। एक ग्राहक ने बताया कि रोजे में अगर सूतफेनी न खाई जाए तो इफ्तार अधूरा सा लगता है। इसका स्वाद बेहद लाजवाब होता है, इसलिए परिवार के लिए हर साल इसे जरूर खरीदा जाता है। सिर्फ मुस्लिम ही नहीं, बल्कि हिंदू परिवारों में भी यह मिठाई तीज-त्योहारों पर इस्तेमाल की जाती है। यही कारण है कि प्रयागराज की सूतफेनी आज भी आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द की प्रतीक बनी हुई है। रमजान के महीने में इसकी मिठास पूरे शहर में घुली नजर आ रही है।
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