श्रावस्ती हवाई अड्डे पर दिसंबर 2024 के बाद से हवाई सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं। वर्ष 2024 की शुरुआत में जब इसका संचालन शुरू हुआ था, जो महज नौ महीनों के भीतर ही यह उत्साह ठंडा पड़ गया और वर्तमान में एयरपोर्ट का रनवे और टर्मिनल सूना पड़ा है। हवाई सेवाओं के बंद होने के पीछे कई तकनीकी कमियां प्रमुख कारण हैं। श्रावस्ती एयरपोर्ट के अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया की यहां केवल दिन में उड़ान संभव है। खराब दृश्यता या मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में विमानों की लैंडिंग संभव नहीं हो पाती है। इसके अतिरिक्त, एयरपोर्ट पर एविएशन फ्यूल स्टेशन की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है, जिससे विमानों को ईंधन के लिए अन्य हवाई अड्डों पर निर्भर रहना पड़ता है। दरअसल, श्रावस्ती हवाई अड्डे पर केवल छोटे, 19-सीटर विमानों का ही संचालन संभव है। बौद्ध पर्यटन के लिए आने वाले विदेशी पर्यटक अक्सर 50 या उससे अधिक समूह में यात्रा करते हैं, जिसके लिए छोटे विमान पर्याप्त नहीं होते। इस कारण एयरलाइंस इस मार्ग को व्यावसायिक रूप से लाभकारी नहीं मान रही हैं और कोई नया ऑपरेटर सेवा शुरू करने को अभी तैयार नहीं है। हवाई सेवा ठप होने से विदेशी और स्थानीय यात्रियों को लखनऊ और वाराणसी हवाई अड्डों पर निर्भर रहना पड़ता है। वहां से श्रावस्ती तक सड़क मार्ग से पहुंचने में अधिक समय और लागत लगती है, जिससे यात्रियों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। एयरपोर्ट के पूर्ण विकास के लिए विस्तारीकरण, नाइट लैंडिंग सुविधा और आधुनिक नेविगेशन सिस्टम की स्थापना आवश्यक है। इन सुविधाओं के बिना बड़े विमानों का संचालन संभव नहीं है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है, लेकिन एक पूर्ण विकसित हवाई अड्डे के रूप में इसे तैयार होने में अभी लंबा समय लग सकता है। स्थानीय व्यापारी और पर्यटन से जुड़े लोग चाहते हैं कि श्रावस्ती एयरपोर्ट पर तकनीकी कमियों को जल्द दूर कर नियमित उड़ान सेवा बहाल की जाए, ताकि श्रावस्ती को उसकी वास्तविक हवाई पहचान मिल सके।