शाहजहांपुर में टीईटी परीक्षा अनिवार्य किए जाने के विरोध में शिक्षकों का तीन दिवसीय आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया और उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय आह्वान पर यह प्रदर्शन किया जा रहा है। जनपद के लगभग 5 हजार शिक्षक-शिक्षिकाओं ने काली पट्टी बांधकर अपने विद्यालयों में नियमित कार्य करते हुए सरकार के निर्णय के प्रति विरोध जताया। शिक्षकों ने इस कदम को सेवा शर्तों में "उत्पीड़नात्मक संशोधन" करार दिया है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मीडिया प्रभारी राजकुमार तिवारी ने बताया कि आंदोलन का नेतृत्व टीएफआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और संघ के प्रांतीय महामंत्री संजय सिंह, जिला अध्यक्ष मुनीश मिश्र, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष मंगरे लाल सहित अन्य सहयोगी संगठनों के जिलाध्यक्ष कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी नेताओं का तर्क है कि नियुक्ति के समय निर्धारित सेवा शर्तों को पूरा कर चुके और लगभग 30 वर्ष से सेवा में कार्यरत शिक्षकों पर सेवानिवृत्ति के करीब टीईटी परीक्षा अनिवार्य करना अनुचित है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि सेवा शर्तों में इस तरह के बदलाव किए जाते हैं, तो भविष्य में वर्तमान में चयनित शिक्षकों पर भी नए नियम थोपे जा सकते हैं। शिक्षकों की मांग है कि नियुक्ति के समय लागू सेवा शर्तें पूरे सेवाकाल में यथावत रहनी चाहिए। इस आंदोलन में प्राथमिक शिक्षक संघ, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ और महिला शिक्षक संघ सहित कई शिक्षक संगठनों ने एकजुटता दिखाई है। जिला मीडिया प्रभारी ने आगे बताया कि तीन दिवसीय काली पट्टी आंदोलन के बाद 26 फरवरी को दोपहर 2 बजे जनपद के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं बीएसए कार्यालय पर एकत्रित होंगे। वहां से पैदल मार्च करते हुए जिलाधिकारी को प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके अतिरिक्त, देश की राजधानी दिल्ली में लाखों शिक्षकों द्वारा एक बड़े विरोध प्रदर्शन की भी घोषणा की गई है।शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सेवा शर्तों में किए गए इस संशोधन को वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन चरणबद्ध रूप से जारी रहेगा।
Readers Comments