सिद्धार्थनगर में ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर पंचायत भवनों का निर्माण कराया था। इन भवनों में पंचायत सहायक, ग्राम पंचायत सचिव और रोजगार सेवक की तैनाती इस उद्देश्य से की गई थी कि ग्रामीणों को प्रमाण पत्र, योजनाओं की जानकारी और शिकायत निवारण जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल सकें। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आई। पहले 5 तस्वीरों में देखिए हालात…. 23 फरवरी को दैनिक भास्कर टीम ने जिले के कई पंचायत भवनों का औचक निरीक्षण किया, जिसमें सरकारी व्यवस्था की पोल खुलती दिखी। बिशनपुर: पंचायत भवन बना पशुओं का आश्रय सुबह 11:00 बजे टीम बांसी विकासखंड के ग्राम पंचायत बिशनपुर पहुंची। यहां पंचायत भवन के बाहर मुर्गियां घूम रही थीं, जबकि अंदर बकरियां बंधी मिलीं। ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए बने इस भवन में कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। बयारी और कोटखास: ताले में बंद व्यवस्था दोपहर 12:00 बजे टीम इटवा विकासखंड के ग्राम पंचायत बयारी पहुंची, जहां पंचायत भवन के मुख्य गेट पर ताला लटका मिला। ग्रामीणों ने बताया कि भवन अक्सर बंद रहता है और कर्मचारी शायद ही कभी आते हैं। 12:30 बजे कोटखास पंचायत भवन में भी यही स्थिति देखने को मिली — दरवाजे पर ताला और परिसर सुनसान। जोगिया और चनरगड्डी: कागजों में संचालित भवन दोपहर 1:00 बजे जोगिया विकासखंड के जोगिया पंचायत भवन का निरीक्षण किया गया। भवन बंद मिला। ग्रामीणों ने बताया कि यहां कई दिनों तक कोई कर्मचारी नहीं आता। दोपहर 2:00 बजे नौगढ़ विकासखंड के चनरगड्डी पंचायत भवन में भी ताला लटका मिला। भवन पंचायत कार्यों के बजाय एक खाली ढांचे की तरह नजर आया। जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण, फिर भी अनुपस्थिति सरकार ने पंचायत भवनों के संचालन के लिए कर्मचारियों की जिम्मेदारियां तय की हैं: ग्राम पंचायत सचिव: प्रशासनिक कार्य, योजनाओं का क्रियान्वयन, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करना, पंचायत बैठक संचालन पंचायत सहायक: सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक उपस्थित रहकर ग्रामीणों की सहायता रोजगार सेवक: मनरेगा पंजीकरण, जॉब कार्ड, कार्य आवंटन और रोजगार उपलब्ध कराना लेकिन पड़ताल में किसी भी भवन में कोई कर्मचारी मौजूद नहीं मिला। ग्रामीण बोले — “कागजों में चल रहे पंचायत भवन” ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन केवल कागजों में संचालित हो रहे हैं। उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान के लिए ब्लॉक या तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। जिम्मेदारी तय होगी: मुख्य विकास अधिकारी इस मामले पर बलराम सिंह, मुख्य विकास अधिकारी ने कहा: पंचायत भवनों के संचालन के लिए पंचायत सहायकों की नियुक्ति की गई है। सचिव का भी रोस्टर के अनुसार ग्राम सभा में बैठना अनिवार्य है। यदि पंचायत भवन नहीं खोले जा रहे हैं, तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।