लखनऊ विकास प्राधिकरण की सुल्तानपुर रोड स्थित आईटी सिटी योजना में शामिल 11 गांवों की जमीनों की खरीद-बिक्री पर अगले 15 दिनों में रोक लग सकती है। प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। रोक लगने के बाद बाहरी लोग यहां जमीन की रजिस्ट्री नहीं करा सकेंगे। सिर्फ मूल भूस्वामी ही लैंडपूलिंग प्रक्रिया में हिस्सा ले पाएंगे। एलडीए किसान पथ के किनारे 3409 एकड़ में आईटी सिटी विकसित कर रहा है। योजना में अब तक करीब 1000 एकड़ जमीन लैंडपूलिंग के जरिए ली जा चुकी है। इसके तहत जमीन देने वाले किसानों को 25% विकसित प्लॉट दिए जा रहे हैं, जबकि 10 एकड़ से अधिक जमीन देने वालों को 50% तक विकसित जमीन लौटाई जा रही है। पहले चरण में लैंडपूलिंग करने वाले किसानों के लिए 28 फरवरी को प्लॉटों की लॉटरी प्रस्तावित है। छह महीने पहले स्वीकृत इस योजना के लिए अब तक करीब एक-तिहाई जमीन जुटाई जा चुकी है। शेष जमीन तेजी से हासिल करने के लिए एलडीए अब खरीद-बिक्री पर रोक लगाने की तैयारी में है। रोक के बाद भी जारी रहेगी लैंडपूलिंग योजना के संयुक्त सचिव सुशील प्रताप सिंह के मुताबिक, लगभग 1000 एकड़ सरकारी जमीन का पुनर्ग्रहण किया जाएगा, जो शासनादेश के बाद एलडीए को मिल जाएगी। इस तरह करीब 2000 एकड़ जमीन उपलब्ध हो जाएगी। शेष 1000 एकड़ भी लैंडपूलिंग से जुटाई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि खरीद-बिक्री पर रोक लगने के बाद भी लैंडपूलिंग जारी रहेगी, लेकिन यह केवल मूल किसान ही कर सकेंगे। कोई बाहरी व्यक्ति जमीन खरीदकर योजना में शामिल नहीं हो पाएगा। रजिस्ट्री पर रोक के लिए निबंधन विभाग को गाटा नंबर सहित पूरा ब्योरा भेजा जा रहा है, ताकि एलडीए के अलावा किसी अन्य के पक्ष में रजिस्ट्री न हो। योजना में शामिल गांव बक्कास, सोनई कंजेहरा, सिकंदरपुर अमोलिया, सिद्धपुरा, परेहटा, पहाड़नगर टिकरिया, रकीबाबाद, मोहारी खुर्द, मोहारी कला, खुजौली और भटवारा गांव इस योजना में शामिल हैं। एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने बताया कि योजना में शामिल गांवों की जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के लिए जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को पत्र भेजा गया है। जल्द ही रोक लागू होगी। इसके बाद रजिस्ट्री बंद कर दी जाएगी।
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