बरेली में समाजवादी पार्टी के आंवला सांसद नीरज मौर्य ने भाजपा सरकार पर चौतरफा हमला बोला। सांसद ने सर्किट हाउस में आवारा पशुओं की दुर्दशा पर कहा- वर्तमान सरकार की नीतियां जनविरोधी हैं। गौवंश की उपेक्षा के कारण लगने वाला श्राप 2027 में इस सरकार के पतन का कारण बनेगा। उन्होंने आवारा पशुओं के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा- यह सरकार गायों की हत्या करवा रही है, जिससे किसान और अन्नदाता दोनों परेशान हैं। आंवला की गौशाला में 25 गौवंश मर गए। यह हाल उस जगह का है जहां से खुद पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह आते हैं। मैंने लोकसभा में नियम 377 के तहत पूरे भारत में गौवंश संरक्षण के लिए एक अलग आयोग बनाने की मांग भी उठाई है। पीएम केयर फंड के वेंटिलेटर खराब बरेली की स्वास्थ्य सेवाओं पर बात करते हुए सांसद नीरज मौर्य ने कहा- पीएम केयर फंड से जिले को एक हजार वेंटिलेटर मिले थे, लेकिन जानकारी मिल रही है कि वे काम ही नहीं कर रहे हैं। ये सरकार मात्र 5 एकड़ जमीन क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल के लिए उपलब्ध नहीं करवा सकी। केंद्र से मिलता है जवाब, राज्य सरकार रहती है मौन सांसद ने कार्यप्रणाली पर बड़ा खुलासा करते हुए कहा- जब वे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रियों को पत्र लिखते हैं, तो वहां से जवाब आता है। लेकिन उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार उनकी बातों और पत्रों पर कोई ध्यान नहीं देती। उन्होंने आंवला के लिए अलीगंज बाईपास और बांदीकुई ट्रेन की तरह ज्योति बहेड़ा रेल सेवा को भी जल्द बहाल करने की मांग की। 'एक देश, एक वोटर लिस्ट' की मांग उन्होंने 'एक देश, एक वोटर लिस्ट' की वकालत करते हुए कहा कि अलग-अलग वोटर लिस्ट से भ्रम फैलता है। 2027 के चुनाव पर उन्होंने भविष्यवाणी की कि जनता 2024 की तरह ही भाजपा को जवाब देगी 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी। किसानों को खाद की जगह मिली लाठियां किसानों की बदहाली पर दुख जताते हुए सांसद ने कहा- कृषि प्रधान देश में किसान को फसल का सही दाम नहीं मिल रहा है। खाद के लिए लाइन में लगे किसानों को लाठियां मिली हैं। उन्होंने तंज कसा कि कुछ लोग डिप्टी सीएम तो बन गए हैं, लेकिन सरकार में उनकी चल नहीं रही है, जिससे वे छटपटा रहे हैं। मोहन भागवत के बयानों पर उन्होंने कहा कि वे अपनी बात पर कायम नहीं रहते। जानें कौन हैं सपा सांसद नीरज मौर्य बसपा के पूर्व कद्दावर मंत्री और अब अखिलेश यादव के भरोसेमंद सिपाही, आंवला की सियासत के नए ‘चाणक्य’ नीरज मौर्य उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक जाना-पहचाना चेहरा हैं। मूल रूप से शाहजहांपुर जिले के निवासी नीरज मौर्य की पहचान एक प्रखर और जुझारू नेता के रूप में होती है। उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत जमीनी स्तर से की और पिछड़ा वर्ग, विशेषकर मौर्य-शाक्य समाज में अपनी गहरी पैठ बनाई। उनकी शिक्षा और प्रारंभिक जीवन संघर्षों से भरा रहा, जिसने उन्हें आम जनता के मुद्दों से जोड़कर रखा। बसपा में रसूख और मंत्री पद का अनुभव नीरज मौर्य ने अपने राजनीतिक जीवन का एक लंबा और महत्वपूर्ण समय बहुजन समाज पार्टी (BSP) में बिताया। वह बसपा सुप्रीमो मायावती के बेहद करीबी माने जाते थे। इसी का परिणाम था कि वह जलालाबाद (शाहजहांपुर) से विधायक चुने गए और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी प्राप्त किया। संगठन चलाने के उनके अनुभव ने उन्हें राज्य स्तर पर पहचान दिलाई। समाजवादी पार्टी में एंट्री और 2024 की बड़ी जीत साल 2022 के विधानसभा चुनाव के आसपास नीरज मौर्य ने समाजवादी पार्टी का दामन थामा। अखिलेश यादव के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले में नीरज मौर्य फिट बैठे। पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए 2024 के लोकसभा चुनाव में आंवला संसदीय सीट से मैदान में उतारा। उन्होंने भाजपा के दिग्गज नेता धर्मेंद्र कश्यप को हराकर इस सीट पर सपा का परचम लहराया और संसद पहुंचे। आक्रामक कार्यशैली और स्थानीय मुद्दों पर पकड़ संसद में कदम रखने के बाद से ही नीरज मौर्य काफी सक्रिय हैं। वह केवल दिल्ली की राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बरेली और आंवला के स्थानीय मुद्दों जैसे—बंद पड़ी ट्रेनें (ज्योति बहेड़ा), एम्स (AIIMS) की मांग और गौशालाओं की बदहाली पर लगातार सरकार को घेर रहे हैं। लोकसभा में पूछे गए सवाल से बड़ा खुलासा बरेली के स्वास्थ्य ढांचे के लिए यह एक बड़ा झटका है। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के तहत जिले को मिलने वाला क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक और एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला अब लखनऊ स्थानांतरित कर दी गई है। 2021 से 2026 तक स्थानीय प्रशासन इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए भूमि उपलब्ध कराने में विफल रहा, जिसका खामियाजा अब बरेली की जनता को भुगतना होगा। लोकसभा में गूँजा बरेली की 'नाकामी' का मुद्दा सांसद नीरज मौर्य द्वारा लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने इस कड़वे सच से पर्दा उठाया। मंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश के लिए स्वीकृत 75 प्रयोगशालाओं और 74 गहन चिकित्सा ब्लॉकों की सूची में बरेली का नाम था, लेकिन जमीन न मिलने के कारण इस प्रोजेक्ट को लखनऊ शिफ्ट करना पड़ा। यह खुलासा होते ही स्थानीय स्तर पर हड़कंप मच गया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर प्रशासनिक शिथिलता को दर्शाता है। उनका बेबाक अंदाज और सीधे सवाल पूछने की शैली उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती है। नीरज मौर्य की प्रोफाइल: एक नजर में पूरा नाम: नीरज मौर्य वर्तमान पद: सांसद, आंवला लोकसभा क्षेत्र (उत्तर प्रदेश) राजनीतिक दल: समाजवादी पार्टी (सपा) पूर्व अनुभव: पूर्व विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रमुख प्रभाव क्षेत्र: बरेली, आंवला और शाहजहांपुर मुख्य पहचान: पिछड़ा वर्ग के प्रखर नेता और रणनीतिकार ………………. ये खबर भी पढ़िए… CRPF जवान ने सिपाही बहन के प्रेमी को काट डाला, इटावा में UPSC छात्र को बहाने से कार में बिठाया, पीटा फिर गोली मारी इटावा में CRPF जवान ने सिविल सर्विसेज की तैयारी करने वाले छात्र की गोली 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