संतकबीरनगर के पौली ब्लॉक में बीडीओ श्वेता वर्मा और ग्राम पंचायत सचिव की शिकायत पर सत्ता पक्ष के एक नेता के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने में कथित हीलाहवाली से राजनीति गरमा गई है। 24 घंटे बीत जाने के बाद भी प्राथमिकी दर्ज नहीं होने से विकास विभाग के कर्मचारियों में नाराजगी है। बुधवार को सभी विकासखंडों के कर्मचारी कामकाज बंद कर विकास भवन में नारेबाजी व्यक्त कर प्रदर्शन किया क्या है पूरा मामला… मामला पौली ब्लॉक का है, जहां बीडीओ श्वेता वर्मा, ग्राम पंचायत सचिव रमाकांत और भाजपा मंडल अध्यक्ष अरविंद सिंह के बीच विवाद हुआ। बीडीओ और सचिव मंगलवार करीब तीन बजे धनघटा थाने पहुंचे और अरविंद सिंह के खिलाफ तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की। सूचना मिलने पर एसडीएम और सीओ समेत तहसील स्तर के अधिकारी थाने पहुंच गए। आरोप है कि मामला सत्ता पक्ष के नेता से जुड़ा होने के कारण तत्काल एफआईआर दर्ज करने के बजाय अधिकारियों ने दोनों पक्षों में समझौता कराने का प्रयास किया। हालांकि बीडीओ और सचिव अपनी शिकायत पर मुकदमा दर्ज कराने की मांग पर अड़े रहे। डीएम से की मुलाकात थाने स्तर पर कार्रवाई न होने पर देर रात बीडीओ श्वेता वर्मा ने जिलाधिकारी Alok Kumar से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। जिलाधिकारी ने मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बावजूद बुधवार को 24 घंटे बीत जाने के बाद भी संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज नहीं हो सका। इससे कर्मचारियों में आक्रोश और बढ़ गया। घटना के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल है। कुछ भाजपा नेता मंडल अध्यक्ष अरविंद सिंह के समर्थन में नजर आए, जबकि कुछ ने चुप्पी साध ली। वहीं, कुछ वरिष्ठ नेता और अधिकारी मामले में हस्तक्षेप कर सुलह कराने की कोशिश में जुटे हैं। कर्मचारियों का आंदोलन ग्राम पंचायत संघ के जिलाध्यक्ष क्षितिज चौधरी ने साफ कहा कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी, प्रदर्शन जारी रहेगा। कर्मचारियों ने इसे प्रशासनिक निष्पक्षता का सवाल बताते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। फिलहाल जिले में यह मामला प्रशासन और राजनीति के लिए परीक्षा की घड़ी बन गया है। अब सभी की नजर इस पर है कि पुलिस कब और किन धाराओं में मुकदमा दर्ज करती है।
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