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SGPGI से KGMU 18 मिनट में पहुंचाया लिवर:लखनऊ पुलिस ने बनाया ग्रीन कॉरिडोर, ब्रेन डेड मरीज को 2 गाड़ियों से एस्कॉर्ट किया
Feb 22, 2026
लखनऊ में 42 साल के ब्रेन डेड मरीज से 3 लोगों को नई जिंदगी मिली है। इसके साथ ही दो लोगों की आंखों की रोशनी भी लौटी है। मरीज SGPGI के अपेक्स ट्रॉमा में भर्ती था। रविवार 22 फरवरी को डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद डॉक्टरों ने उसके परिजनों की काउंसलिंग उसके ऑर्गन (अंदरूनी अंग) दान करने के लिए की। जैसे ही परिजन राजी हुए, डॉक्टरों ने फौरन प्रक्रिया शुरू कर दी। पहले दोनों किडनी को ट्रांसप्लांट के लिए वहीं निकाल लिया गया। उसके बाद KGMU को लिवर के लिए सूचना देते हुए पुलिस की मदद मांगी गई। पुलिस ने मरीज की एंबुलेंस को 2 गाड़ियों से एस्कॉर्ट करते हुए दोनों के संस्थान के बीच की 14 किमी की दूरी 18 मिनट में तय करवा दी। 2 तस्वीरें देखिए… रविवार शाम हजरतगंज का अचानक थमा ट्रैफिक लखनऊ में ग्रीन कॉरिडोर बनने से अचानक रविवार शाम हजरतगंज चौराहे का ट्रैफिक थम गया। लखनऊ पुलिस की मुस्तैदी का नतीजा रहा कि बिना किसी व्यवधान के महज 18 मिनट के भीतर एंबुलेंस KGMU पहुंच गई। इस दौरान आम लोगों भी एंबुलेंस देख ट्रैफिक सपोर्ट देने के लिए ठहरते नजर आए। लखनऊ पुलिस के अनुसार, ब्रेन डेड मरीज की एंबुलेंस को शाम 6:14 बजे SGPGI से निकाला गया। उसके बाद 2 गाड़ियों से एस्कॉर्ट करते हुए 6:32 बजे KGMU पहुंचा दिया गया। इस दौरान तेलीबाग-कैंट-हजरतगंज रूट से एंबुलेंस निकाली गई। रास्ते में पड़ने वाले सभी ट्रैफिक पोस्ट और चौकियों को पहले से अलर्ट कर दिया गया था। 7 फरवरी को दुर्घटना में हुए थे घायल मरीज लखनऊ के संदीप कुमार (42) थे। वह 7 फरवरी को एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनका इलाज कई अस्पतालों में चला, पर इस दौरान उन्हें राहत नहीं मिली। 21 फरवरी को परिजनों ने उन्हें SGPGI के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में शिफ्ट कराया। अगले ही दिन 22 फरवरी को डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद SGPGI के डॉक्टरों ने परिजनों को ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए राजी किया। अनुमति मिलने के बाद डॉक्टरों ने ऑर्गन ट्रांसप्लांट की दिशा में कदम बढ़ाए गए। दो किडनी, एक लिवर और आंखों को रिकवर किया गया। इनमें से लिवर और आंखों को KGMU भेजकर वहां के मरीजों के उपयोग में लाने के लिए भेजा गया। जबकि दोनों किडनी को SGPGI के मरीजों को ही ट्रांसप्लांट किया गया। इस दौरान ग्रीन कॉरिडोर बनाकर 18 मिनट के भीतर SGPGI से लिवर और आंख KGMU भेजी गई। KGMU में लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा मौजूद SGPGI में ब्रेन डेड से दोनों किडनी लेकर यहां के जरूरतमंद मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। जबकि लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा फिलहाल SGPGI में मौजूद नहीं हैं। जबकि KGMU में लिवर ट्रांसप्लांट किया जाता हैं। यही कारण रहा कि ग्रीन कॉरिडोर बनाकर लिवर KGMU भेजा गया। साथ ही दोनों आंखे भी भेजी गई। उन्हें KGMU के आई बैंक में रखा जाएगा। 20 साल बाद SGPGI को मिला अवसर SGPGI के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. नारायण प्रसाद ने बताया कि मSGPGI में ही दोनों किडनी का ट्रांसप्लांट हो रहा हैं। दोनों महिला हैं। इनमें से एक उन्नाव और दूसरी मैनपुरी की निवासी हैं। दोनों का किडनी ट्रांसप्लांट चल रहा है। रात 10:30 बजे तक दोनों किडनी ट्रांसप्लांट होने की उम्मीद है। जबकि, लिवर ट्रांसप्लांट के लिए KGMU के मरीज को लिवर डोनेट किया गया है। उन्होंने दावा किया कि करीब 20 साल बाद SGPGI को खुद ऐसा ब्रेन डेड मरीज मिला है, जिसके ऑर्गन्स से जरूरतमंदों को नई जिंदगी दी जा सके। इससे पहले जब मैं खुद यहां का रेजिडेंट डॉक्टर था, तब एक ऐसा अवसर मिला था। अच्छी बात यह है कि लोग ऑर्गन ट्रांसप्लांट को लेकर जागरूक हो रहे हैं। खबर अपडेट की जा रही है…
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