प्रयागराज (इलाहाबाद) की एक विशेष POCSO कोर्ट (Additional Sessions Judge Vinod Kumar Chaurasia) ने 21 फरवरी 2026 को आदेश दिया कि ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी (या मुकुंदानंद ब्रह्मचारी) के खिलाफ बाल यौन शोषण (sexual exploitation of minors) के आरोपों में FIR दर्ज की जाए।

मुख्य तथ्य:

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FIR झूंसी थाने (प्रयागराज) में दर्ज हुई है, जिसमें POCSO एक्ट की धाराएं (जैसे 3/5/9/17) और BNS की संबंधित धाराएं (69, 74, 75 आदि, जो यौन अपराध से जुड़ी हैं) लगाई गई हैं।

आरोप दो नाबालिगों (14 और 17 वर्ष के आसपास) पर हैं, जो आश्रम में धार्मिक मार्गदर्शन के बहाने यौन शोषण का शिकार होने का दावा करते हैं।

शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी (या आशुतोष पांडे/शाकुंभरी पीठाधीश्वर) हैं, जो जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य हैं। उन्होंने कोर्ट में धारा 173(4) CrPC के तहत अर्जी दी थी, और पीड़ितों के बयान भी कोर्ट में दर्ज हुए।

पुलिस ने FIR के बाद जांच शुरू कर दी है; एक टीम (डीसीपी मनीष कुमार शांडिल्य के नेतृत्व में) बयान दर्ज करने पहुंची है।

मुकुंदानंद का बयान:

आपने जो उद्धृत किया है, वह सटीक मेल खाता है। मुकुंदानंद ने मीडिया से कहा:

"गोली मार दो लेकिन ऐसा घृणित आरोप मत लगाओ।"

शंकराचार्य "चरित्रवान हैं और क्रिस्टल की तरह साफ हैं।"

आरोप लगाने वाले आशुतोष को "हिस्ट्रीशीटर" बताया (कुछ रिपोर्ट्स में उनके खिलाफ 20+ पुराने केस का जिक्र है, और परिवार पर ब्लैकमेलिंग/फर्जी मुकदमों का आरोप)।

उन्होंने माघ मेले में अपनी मुलाकातों, मीडिया हैंडलिंग और शंकराचार्य के साथ निकटता का जिक्र किया, और इसे साजिश बताया।

शंकराचार्य पक्ष ने भी आरोपों को झूठा, साजिशपूर्ण और राजनीतिक/धार्मिक प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित बताया है (कुछ में योगी सरकार या अन्य से जुड़े विवादों का संदर्भ)। वे त्वरित जांच और सबूत पेश करने को तैयार हैं।

यह मामला संवेदनशील है, जांच चल रही है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष पुलिस/कोर्ट पर निर्भर है