शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यौन शोषण का मुकदमा दर्ज होने के बाद कांग्रेस उनके समर्थन में उतर आई है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने कलेक्टरेट पहुंचकर प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। यह मामला प्रयागराज के झूसी थाने में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन शोषण के आरोप में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। इस घटना के बाद प्रशासन और शंकराचार्य आमने-सामने आ गए हैं। अब कांग्रेस भी शंकराचार्य के पक्ष में खड़ी हो गई है। प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंहल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेसी नारेबाजी करते हुए कलेक्टरेट पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि शंकराचार्य के खिलाफ फर्जी एफआईआर दर्ज कर उनके चरित्र हनन का प्रयास किया जा रहा है। कांग्रेसियों ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लोगों की आवाज दबाती है। उन्होंने कहा कि सरकार की हठधर्मिता के कारण ही ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्यों को परेशान किया जा रहा है। कांग्रेस ने कुंभ के दौरान मौनी अमावस्या पर पुलिस द्वारा उन्हें और उनके शिष्यों को स्नान करने से रोके जाने और बटुकों को अपमानित कर थाने ले जाने की घटना का भी जिक्र किया। ज्ञापन में आगे कहा गया है कि अब शंकराचार्य, उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी सहित सम्मानित सनातनी लोगों के खिलाफ यौन शोषण के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई है। कांग्रेस ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का हवाला देते हुए धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक संप्रदायों के अधिकारों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का पद सनातन परंपरा में सर्वोच्च आध्यात्मिक पदों में से एक है। कांग्रेस ने मांग की है कि एफआईआर दर्ज कराने वाले व्यक्तियों की पृष्ठभूमि, उनकी परिस्थितियों और संभावित प्रेरक तत्वों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए। इस अवसर पर विजय पासी, सदाशिव यादव, अनिल सिंह, करनवीर सिंह, सर्वेश कुमार सिंह, राकेश तिवारी, डॉ. अरविंद चतुर्वेदी और राम लखन शुक्ला सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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