उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में एक आयुर्वेदिक दवा कारखाने में 15 फरवरी को हुए गैस सिलेंडर विस्फोट में संचालक के दो बेटों की इलाज के दौरान मौत हो गई है। इस हादसे में कुल पांच लोग झुलस गए थे, जिनमें कारखाना संचालक भी शामिल थे। संचालक की भी कुछ दिन पहले इलाज के दौरान मौत हो गई थी। गाजीपुर थाना क्षेत्र के खेसहन गांव निवासी डॉ. जमील अहमद कुरैशी (65) पिछले 30 वर्षों से बहुआ कस्बे में होम्योपैथी और आयुर्वेदिक दवाओं का क्लीनिक चला रहे थे। करीब 10 साल पहले उन्होंने अपने घर में 'न्यू किरण फार्मेसी' नाम से आयुर्वेदिक दवाओं का कारखाना शुरू किया था। इस कारखाने में कपूर, पिपरमिंट, अलसी का तेल और अन्य ज्वलनशील रसायनों का उपयोग कर दवाएं बनाई जाती थीं। 15 फरवरी की शाम को कारखाने में रसोई गैस सिलेंडर फट गया, जिससे भीषण आग लग गई। विस्फोट इतना जोरदार था कि डॉ. जमील अहमद कुरैशी सिलेंडर के टुकड़ों के साथ बाहर जा गिरे। इस दौरान कारखाने के अंदर उनके बेटे अकील अहमद कुरैशी (26), छोटा बेटा उजेफा कुरैशी (13), साले का बेटा अबू सहमा (15) और भांजे महबूब अली की बेटी बुशरा खातून (10) गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के बाद डॉ. जमील अहमद कुरैशी को जिला अस्पताल से कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर किया गया, जबकि अन्य घायलों को सीधे कानपुर ले जाया गया था। गंभीर हालत के कारण डॉ. जमील और अकील को बाद में लखनऊ के केजीएमयू रेफर किया गया। इलाज के दौरान पहले डॉ. जमील अहमद कुरैशी की मौत हुई। इसके बाद रविवार रात अबू सहमा ने दम तोड़ दिया, और सोमवार रात उजेफा की भी मौत हो गई।