उत्तर प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों और सरकार के बीच गतिरोध बढ़ गया है। उच्चतम न्यायालय के हालिया फैसले के विरोध में हरदोई जनपद के सभी मान्यता प्राप्त शिक्षक संगठन एक साथ आ गए हैं। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने घोषणा की है कि आज, 23 फरवरी से 25 फरवरी तक सभी शिक्षक स्कूलों में काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करेंगे और अपना विरोध दर्ज कराएंगे। शिक्षकों का मुख्य विरोध 1 सितंबर 2025 के उस आदेश को लेकर है। इस आदेश के तहत, पूर्व में नियुक्त शिक्षकों के लिए भी सेवा में बने रहने और पदोन्नति प्राप्त करने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष शिव शंकर पांडेय ने इस संबंध में कहा कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 27 जुलाई 2011 से लागू हुआ था। नियमानुसार, इसके बाद नियुक्त शिक्षकों पर ही टीईटी लागू होनी चाहिए। उन्होंने पुराने शिक्षकों पर इसे थोपने को 'प्राकृतिक न्याय' के सिद्धांतों के विरुद्ध बताया। शिक्षक संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। इसके तहत, 26 फरवरी को बीएसए कार्यालय पर एक विशाल धरना-प्रदर्शन और घेराव की योजना है। शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, उनका आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।