ताज महोत्सव में इस बार कई ऐसी स्टॉल हैं जो दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। इन्हीं में से एक है बिहार के मधुबनी से आई महिला शिल्पकार की मधुबनी पेंटिंग्स की स्टॉल, जहां प्राकृतिक रंगों से बनी कलाकृतियां लोगों को खासा लुभा रही हैं। महिला शिल्पकार ने बताया कि वह फूलों और पत्तियों से निकाले गए नेचुरल कलर से पेंटिंग तैयार करती हैं। उनके अनुसार करीब 2 किलो फूलों से मात्र 100 ग्राम रंग निकलता है, जिससे यह कला और भी मेहनत भरी हो जाती है। उन्होंने बताया कि उनके पास 600 रुपए से लेकर 11,500 रुपए तक की पेंटिंग्स उपलब्ध हैं। साथ ही साड़ियों और कपड़ों पर भी मधुबनी पेंटिंग की जाती है। शिल्पकार ने बताया कि इस कला में बारीकी का विशेष महत्व होता है। जितनी अधिक बारीक और बड़ी पेंटिंग होती है, उसकी कीमत उतनी ही अधिक होती है। उन्होंने बताया कि उनकी दादी को मधुबनी पेंटिंग के लिए पद्मश्री सम्मान भी मिल चुका है, और वह इस पारंपरिक कला को आगे बढ़ाने का काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वह पिछले 15 वर्षों से ताज महोत्सव में अपनी स्टॉल लगा रही हैं और हर साल उन्हें अच्छा प्रतिसाद मिलता है। इस बार भी अच्छी बिक्री की उम्मीद है। खास बात यह है कि उनके बनाए रंग इतने टिकाऊ होते हैं कि कपड़ा फट सकता है, लेकिन रंग नहीं निकलता और पेंटिंग खराब नहीं होती। साथियों उन्होंने बताया कि वह वेस्ट न्यूज़ पेपर, थर्माकोल और मुल्तानी मिट्टी के फ्लाॉवर पॉट, पेन स्टैंड, फ्रूट बास्केट भी बनाती हैं। महिला शिल्पकार ने बताया कि वह सरसों से काला रंग तैयार करती हैं, जो पूरी तरह प्राकृतिक होता है। उनकी स्टॉल पर पारंपरिक मधुबनी कला की झलक के साथ आधुनिक डिजाइन भी देखने को मिल रहे हैं, जो पर्यटकों को खूब पसंद आ रहे हैं।