जौनपुर स्थित वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए एक व्यापक निगरानी अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। इस पहल के तहत, को-करिकुलर (सह-पाठ्यक्रम) विषयों में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं की उत्तर पुस्तिकाओं की विशेष जांच की जाएगी। इसके साथ ही, जिन महाविद्यालयों का परीक्षा परिणाम 100 प्रतिशत रहा है, उनकी भी अलग से समीक्षा की जाएगी।विश्वविद्यालय को ऐसे संकेत मिले हैं कि कुछ महाविद्यालयों में आंतरिक मूल्यांकन और को-करिकुलर विषयों में असामान्य रूप से अधिक अंक दिए जा रहे हैं। इन विषयों का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की प्रस्तुति क्षमता, व्यावहारिक कौशल, सामाजिक सहभागिता, परियोजना कार्य और सतत मूल्यांकन के आधार पर अंक प्रदान करना होता है। ऐसे में बड़ी संख्या में पूर्णांक मिलना मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। को-करिकुलर विषयों में पूरे अंक देने के मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं की री-स्कूटनी (पुनः जांच) की जाएगी। इस प्रक्रिया में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन, एक ही कॉलेज में बड़ी संख्या में समान उत्तर या एकरूप लेखन की जांच, तथा आंतरिक व बाह्य अंकों के बीच असामान्य अंतर का विश्लेषण शामिल होगा।इसके अतिरिक्त, यह भी समीक्षा की जाएगी कि मूल्यांकन मानकों का उचित पालन हुआ है या नहीं। शत-प्रतिशत परिणाम वाले कॉलेजों के पिछले तीन वर्षों के रिजल्ट पैटर्न का तुलनात्मक अध्ययन भी किया जाएगा, ताकि किसी भी विसंगति का पता लगाया जा सके। सूत्रों के अनुसार, यदि यह पाया जाता है कि आंतरिक अंक कृत्रिम रूप से बढ़ाए गए हैं या छात्रों को अनुचित लाभ देने के लिए अंकन में उदारता बरती गई है, तो यह विश्वविद्यालय की मेरिट सूची और समग्र परिणाम को प्रभावित करेगा। यदि उत्तर पुस्तिकाओं में सामूहिक नकल, कॉपी-पेस्ट उत्तर, मूल्यांकन में घोर लापरवाही या नियमों की अनदेखी पाई जाती है, तो संबंधित परीक्षक को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।कॉलेजों के विरुद्ध भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं, जिनमें मान्यता संबंधी समीक्षा, भविष्य में परीक्षा केंद्र न बनाए जाने और आर्थिक दंड शामिल हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का स्पष्ट मत है कि अंक उपलब्धि का प्रमाण होने चाहिए, न कि केवल एक औपचारिकता। परीक्षा की साख से किसी भी स्थिति में समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।