फर्जी डिग्री और मार्कशीट मामले में पूरे नेटवर्क की जड़ें खंगालने के लिए जुटी SIT की टीमें मंगलवार को अलीगढ़, हापुड़, मेरठ, शिकोहाबाद जांच और छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय पहुंची। टीम ने यहां कई घंटों तक जांच-पड़ताल की। इस दौरान पुलिस ने बरामद 900 मार्कशीट, डिग्री और माइग्रेशन सर्टिफिकेट असली हैं या नकली इसकी जांच की। इन सब के अलावा SIT को शैलेंद्र के 5 अकाउंट भी मिले हैं, जिनकी डिटेल के लिए बैंको से संपर्क किया गया है। माइग्रेशन सर्टिफिकेट की बुकलेट से गायब मिले कई पन्ने ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर हेडक्वार्टर संकल्प शर्मा ने बताया कि जब किदवई नगर पुलिस ने आरोपी के शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन पर दबिश दी थी, तो वहां मौके से सीएसजेएम विश्वविद्यालय की एक माइग्रेशन सर्टिफिकेट बुकलेट मौके से मिली थी। इसके क्रम संख्या 1 से 77 तक व 95 से 97 तक पृष्ठ निकाले गए हैं, साथ ही पेज नंबर 78 से 85 तक डिप्टी रजिस्ट्रार (परीक्षा) सीएसजेएम विश्वविद्यालय कानपुर की मोहर लगी है। ऐसे में बुकलेट असली है या कूटरचित इसकी जांच कराई जा रही है कि। एसआईटी के अधिकारियों के अनुसार, एक टीम विश्वविद्यालय की माइग्रेशन सर्टिफिकेट बुकलेट की जानकारी जुटा कर उसका मिलान करेगी। आरोपियों के पास से डिप्टी रजिस्ट्रार सीएसजेएम विश्वविद्यालय कानपुर की एक मोहर भी पाई गई। मौके से विश्वविद्यालय की एमए की 70 , एमएससी की 15, बीएससी की 44,बीएड की 62, बीए की 109, बीकॉम की 13, एलएलबी की 40 मार्कशीट व 18 डिग्री बरामद हुईं हैं। 2024 में भी फर्जी मार्कशीट गिरोह का हुआ था भंडाफोड़ अगस्त 2024 में भी सीएसजेएम विश्वविद्यालय में फर्जी माकशीट बनाने के खेल का भंडाफोड़ हुआ था। तब पकड़े गए आरोपी शिव कुमार ने कबूला था कि उसने 12 साल में फर्जी मार्कशीट बनाकर कितने लोगों को पास कर दिया है कि उनकी संख्या तक उसे याद नहीं है। आरोपियों में चपरासी जगदीश और प्रयागराज के जार्जटाउन थानाक्षेत्र के पुरादलेर अल्लहापुर निवासी उसके साथी शिवकुमार श्रीवास्तव और आशीष राय शामिल थे। तब आरोपी गजट में भी संशोधन कर रहे थे। इन लोगों ने फेल छात्र नेहाल हुसैन रिजवी की मार्कशीट में फेरबदल कर दिया था। तब कल्याणपुर पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर गजट के 10 पन्ने, 32 खाली मार्कशीट आदि बरामद की थी।