यूपी के बरेली में नगर निगम के एक तानाशाही फैसले के खिलाफ व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। नगर निगम प्रशासन ने दुकानों के किराए में अप्रत्याशित वृद्धि करते हुए इसे 47 गुना तक बढ़ा दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस दुकान का किराया अब तक 700 रुपये प्रति माह था, उसे बढ़ाकर सीधे 14,000 रुपये कर दिया गया है। इसी तरह 800 रुपये वाले किराए को 16,000 रुपये तक पहुँचा दिया गया है। इस भारी भरकम बढ़ोत्तरी से नाराज व्यापारियों ने नगर निगम पहुँचकर मेयर कार्यालय का घेराव किया और जमकर नारेबाजी की। आजादी के पहले की दुकानों पर संकट शहर के जिला अस्पताल रोड और श्यामगंज बाजार जैसे प्रमुख इलाकों में नगर निगम की लगभग 1400 दुकानें हैं। ये व्यापारी पीढ़ियों से, यानी आजादी के पहले से इन दुकानों को चला रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि उस वक्त उन्होंने निगम को 'पगड़ी' (प्रीमियम) भी दी थी और वे हर महीने समय पर किराया जमा करते आ रहे हैं। व्यापारियों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि एक झटके में इतना अधिक किराया बढ़ाना सरासर अन्याय है और इससे उनके परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। सपा पार्षद ने बताया ‘काला कानून’ इस विरोध प्रदर्शन को विपक्षी पार्षदों का भी साथ मिल रहा है। सपा पार्षद राजेश अग्रवाल ने इसे नगर निगम बोर्ड की बैठक में पास कराया गया एक 'काला कानून' करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक इस फैसले को वापस नहीं लिया जाता, तब तक व्यापारी अपना धरना खत्म नहीं करेंगे। व्यापारियों का आरोप है कि जब उन्होंने इस मुद्दे पर मेयर डॉ. उमेश गौतम से बात करने की कोशिश की, तो वे बिना कोई ठोस आश्वासन दिए या बात सुने ही वहां से निकल गए, जिससे दुकानदारों में और भी ज्यादा आक्रोश व्याप्त है। सांसद, विधायक, मंत्री, मेयर और अधिकारियों के चक्कर काट रहे व्यापारी धरने पर बैठे व्यापारियों का कहना है कि है कि हम लोग लगातार सांसद, विधायक, मंत्री, मेयर और अधिकारियों के यहां चक्कर काट रहे है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। व्यापारी बहुत परेशान है। उनका कहना है कि हमारी कोई सुनने वाला ही नहीं है।