बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह के लखनऊ, बलिया के आवास और सोनभद्र में उनकी कंपनी के दफ्तर पर आयकर विभाग (IT) ने छापा मारा है। बुधवार सुबह 50 से ज्यादा अफसर गाड़ियों से विधायक के लखनऊ आवास पर पहुंचे और परिसर घेर लिया। किसी के अंदर-बाहर जाने पर रोक लगा दी गई। टीम फाइलें, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और रिकॉर्ड खंगाल रही है। रेड का पता चलते ही उमाशंकर के समधी और पूर्व विधायक राकेश सिंह पहुंचे। लेकिन, टीम ने उन्हें अंदर जाने नहीं दिया। वहीं, सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज में टीम 12 गाड़ियों में कंपनी के दफ्तर पहुंची। कुछ गाड़ियों पर शादी के पंपलेट लगे थे। यानी अफसर बाराती बनकर पहुंचे। फिलहाल टीम यहां भी दस्तावेज खंगाल रही है। इसके अलावा बलिया के रसड़ा में स्थित उमाशंकर के घर पर भी टीम पहुंची है। मेन गेट बंद कर अंदर सर्चिंग की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, अगस्त 2025 में आई CAG रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि उनकी कंपनी ने 33,604 घनमीटर गिट्टी का अवैध खनन किया। इससे सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ। माना जा रहा है, इसी रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई हो रही है। हालांकि, विभाग की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। उमाशंकर सिंह बलिया की रसड़ा विधानसभा से लगातार 3 बार से विधायक हैं। उन्हें ब्लड कैंसर है। पिछले महीने ही अमेरिका से ब्लड चेंज कराकर लौटे हैं। फिलहाल लखनऊ आवास पर आइसोलेशन में रहकर इलाज करा रहे हैं। उधर, IT की इस कार्रवाई को लेकर योगी सरकार के मंत्री दिनेश सिंह ने नाराजगी जताई। कहा- अगर उन्हें कुछ हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी संवेदनहीन संस्थाओं की होगी। राजनीतिक बदले की भावना से इस तरह की पीड़ा देना बेहद दुखद है। दिनेश सिंह, उमाशंकर सिंह के समधी हैं। छापेमारी की तस्वीरें देखिए- मंत्री दिनेश ने लिखा- विधायक जिंदगी-मौत से जूझ रहे मंत्री दिनेश सिंह ने X पर लिखा- उमाशंकर सिंह के घर में मेरी बेटी की शादी हुई है। इस समय उनके घर पर आयकर विभाग की छापेमारी चल रही है। देश-प्रदेश के सभी राजनेताओं के साथ-साथ आयकर विभाग समेत सभी संस्थाओं को पता है कि वह पिछले 2 साल से ज्यादा समय से जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। मौजूदा हालात में उनके लिए कमाई करना नहीं, अपनी जान बचाना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उनका सारा समय और पैसा इलाज में ही लग रहा। उनके लगभग सभी बिजनेस बंद हैं। वह इस समय अपने आवास पर आइसोलेशन में रहकर इलाज करा रहे हैं। विधानसभा सत्र एक विधायक के लिए बेहद जरूरी होता है, लेकिन वह एक घंटे के लिए भी वहां नहीं जा सके। इस समय उनके घर न तो नर्स को और न ही डॉक्टर को जाने की अनुमति दी जा रही। अगर उनके जीवन को कोई नुकसान होता है, तो इसकी जिम्मेदारी ये संवेदनहीन संस्थाएं होंगी। ऐसे हालात में तो अदालतें गंभीर अपराधों में भी मानवीय आधार पर राहत देती हैं। फिर भी अगर कोई संस्था या नेता राजनीतिक बदले की भावना से इस तरह की पीड़ा देने की सोच सकता है, तो यह बेहद दुखद है। भगवान ऐसे लोगों और संस्थाओं को सद्बुद्धि दे। 54 करोड़ के मालिक, 13 करोड़ कर्ज है 2022 के शपथ पत्र के अनुसार, उमाशंकर सिंह की कुल संपत्ति करीब 54.05 करोड़ रुपए है। इसमें 18.05 करोड़ की चल और 35.99 करोड़ की अचल संपत्ति शामिल है। उन पर 13 करोड़ रुपए का कर्ज भी है। उमाशंकर सिंह राजनीति के साथ कारोबार की दुनिया में भी सक्रिय रहे हैं। उनकी ‘छात्र शक्ति कंस्ट्रक्शन्स’ नाम की कंपनी है, जो सड़क निर्माण का काम करती है। कंपनी ने विभिन्न स्थानों पर रोड कंस्ट्रक्शन के प्रोजेक्ट पूरे किए हैं। इसके अलावा उनकी कंपनी माइनिंग सेक्टर में भी काम करती रही है। निर्माण और खनन के साथ वह शिक्षा और होटल कारोबार से भी जुड़े रहे हैं। उमाशंकर की पत्नी पुष्पा सिंह ‘सीएस इन्फ्रा कंस्ट्रक्शन लिमिटेड’ की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण से जुड़े काम करती है। पिछले साल तबीयत खराब हुई तो मायावती भी मिलने पहुंची थीं उमाशंकर सिंह की बसपा में अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मायावती ने उन्हें राखी बांधी हैं। इतना ही नहीं, 5 मार्च, 2025 को उमाशंकर सिंह की तबीयत खराब होने पर मायावती उनसे मिलने के लिए उनके आवास पहुंची थीं। उन्होंने उनका हाल जाना और परिवार के साथ तस्वीर भी खिंचवाई थी। उमाशंकर सिंह कब-कब चर्चा में जानिए 1- 11 महीने पहले हुई थी विजिलेंस में शिकायत विधायक उमाशंकर सिंह 11 महीने पहले आय से अधिक संपत्ति के मामले में चर्चा में आए थे। उनके खिलाफ विजिलेंस ने जांच शुरू की थी। विजिलेंस ने उनके साथ ही उनकी पत्नी पुष्पा, बेटे युकेश और बेटी यामिनी के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों का ब्योरा जुटाना शुरू किया था। इसमें जमीन, मकान, फ्लैट, व्यावसायिक और कृषि संपत्तियां शामिल थींं। जांच के तहत विजिलेंस ने आईजी प्रयागराज को लेटर लिखकर संपत्तियों की डिलेट मांगी थी। इसके बाद आईजी ने संबंधित विभागों को जानकारी देने के निर्देश दिए थे। वाराणसी के उप-निबंधन कार्यालयों से भी रिकॉर्ड जुटाया गया था। 2- पिछले साल मंत्री दयाशंकर हुई थी जुबानी जंग पिछले साल उमाशंकर सिंह, मंत्री दयाशंकर सिंह से विवाद के बाद चर्चा में आए थे। दरअसल, बलिया के कटहरनाला में बने नए पुल को पीडब्ल्यूडी ने आवागमन के लिए खोल दिया था। इसकी जानकारी मिलने पर दयाशंकर सिंह बलिया पहुंचे। मंत्री ने पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन केसरी प्रकाश को फटकार लगाते हुए कहा था- “देखो, दिमाग खराब न हो। मैं मंत्री हूं। तुम किसी और के कहने पर काम कर रहे हो, मैं सब समझ रहा हूं। तुम यहां से चुनाव लड़ने वाले हो क्या? बसपा तुम्हें टिकट देने वाली है?” उमाशंकर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पलटवार किया था। उन्होंने कहा था- अगर हम आरोप लगाने और प्रमाण देने लगें, तो किसी को छुपने की जगह नहीं मिलेगी। मंत्री जी को अगर पुल से शिकायत है, तो भारत सरकार से बात करें। यह नेशनल हाईवे का मामला है।” इसके बाद दयाशंकर सिंह ने कहा था- उमाशंकर के पिता मिट्टी का तेल बेचते थे, जबकि मैं बलिया के मालवीय कहे जाने वाले मैनेजर सिंह का भांजा हूं। है कि नहीं, आप लोग पता करिए। 3- गोरखपुर में फोरलेन निर्माण को लेकर भी विवादों में रहे 2017 से 2022 के बीच उमाशंकर सिंह ने गोरखपुर में मेडिकल कॉलेज फोरलेन सड़क का निर्माण बतौर ठेकेदार कराया था। इसी दौरान सड़क किनारे नाले का निर्माण भी किया गया था। आरोप था कि नाले की ऊंचाई सड़क से ज्यादा बना दी गई थी। इसके कारण बारिश में आसपास के कई इलाकों में जलभराव हो गया था। यह मामला उस समय के गोरखपुर सदर विधायक राधामोहन दास अग्रवाल ने विधानसभा में उठाया था। उन्होंने उमाशंकर सिंह के खिलाफ शाहपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराने की शिकायत भी की थी। 4- अगस्त 2025 में CAG रिपोर्ट में सामने आया पत्थर खनन का मामला अगस्त 2025 में उमाशंकर से जुड़ा पत्थर खनन का मामला सामने आया था। CAG (भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) रिपोर्ट के मुताबिक, उमाशंकर की पत्नी की कंपनी ‘छात्र शक्ति इंफ्रा कंस्ट्रक्शन’ ने सोनभद्र में खनन का पट्टा लिया था। कंपनी ने 3000 रुपए प्रति घनमीटर की नीलामी दर पर पत्थर खनन का अधिकार हासिल किया, जबकि रॉयल्टी दर 160 रुपए प्रति घनमीटर थी। आरोप था कि कंपनी ने 33,604 घनमीटर गिट्टी का अवैध खनन किया। अवैध खनन के बदले जुर्माना रॉयल्टी दर के आधार पर वसूला गया, जबकि वसूली नीलामी दर से होनी चाहिए थी। अगर नीलामी दर से वसूली होती तो कंपनी को करीब 10 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि देनी पड़ती। लेकिन मामला 3 करोड़ 22 लाख रुपए में निपटा दिया गया। इससे सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ। 2011 में बसपा जॉइन की, तब से लगातार विधायक 2017 में अयोग्य घोषित हुए थे 14 जनवरी 2017 को तत्कालीन राज्यपाल राम नाइक ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया था। उन पर रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के उल्लंघन का आरोप था। मामला सरकारी ठेके अपने नाम पर लेने से जुड़ा था। लोकायुक्त की जांच में आरोप सही पाए गए। बाद में हाईकोर्ट के निर्देश पर चुनाव आयोग की सिफारिश के बाद उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई। यह प्रदेश का पहला मामला था, जब किसी विधायक की सदस्यता पिछली तारीख से समाप्त की गई। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें- पंकज चौधरी को बायोडेटा सौंपने की होड़:200 मंडल अध्यक्षों का ऐलान; यूपी BJP अध्यक्ष बोले- डेढ़ दो सौ क्यों खर्च किए, तुम्हारे काम आता यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि चुनाव आने वाला है और सभी को काम मिलेगा, हर किसी के लिए काम है। बुधवार को लखनऊ में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता उनसे मिलने पहुंचे। एक कार्यकर्ता ने उन्हें भगवा गमछा पहनाकर अभिनंदन किया। इस पर उन्होंने कहा, “इसमें पैसा क्यों खर्च किया? डेढ़-दो सौ रुपए जो खर्च किए, वह तुम्हारे काम आते।” पढ़ें पूरी खबर
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