मेरठ में किदवईनगर में इकबाल के 3 मंजिल घर में भड़की आग में परिवार के 6 लोग जिंदा जल गए। इनमें 1 महिला और 5 बच्चे शामिल हैं। 23 फरवरी की रात 2 बच्चियों के शव दफनाए गए। 24 फरवरी की सुबह महिला समेत 3 बच्चों के शव दफनाए गए। कब्रिस्तान में सबके जेहन में यही सवाल था कि क्या इस दर्दनाक हादसे को रोका जा सकता था? इसका जवाब तलाशने हम किदवईनगर के इस्लामाबाद पहुंचे। जिस गली में इकबाल का घर बताया गया, वो बेहद संकरी थी। यहां हमारी स्कूटी भी नहीं जा सकती थी। मकानों के छज्जे इतने बाहर निकले हुए थे कि एक दूसरे से टच कर रहे थे। मोहल्ले के लोगों से बात करके समझ आया कि रेस्क्यू ऑपरेशन थोड़ा पहले हो सकता था। मगर 3 बड़ी लापरवाहियों की वजह से बच्चों को बचाया नहीं जा सका। पहली- ग्राउंड फ्लोर पर 2 फायर इश्टीग्यूएशन सिलेंडर लगे थे। मगर पूरे घर में किसी को इन्हें इस्तेमाल करना नहीं आता था। दूसरी- 13 साल के भतीजे शहजादा ने सबसे पहले आग देखी। मगर शोर नहीं मचाया। खुद पहली मंजिल तक गया। 15 मिनट बाद शोर मचा। तीसरी- संकरी गली के घर में कामर्शियल एक्टिविटी थी। कपड़ों की बड़ी स्टोरेज थी। CFO सुरेंद्र कुमार सिंह कहते हैं- पॉलिएस्टर कपड़े में पेट्रोल की तरह आग फैल गई, घर की सीढ़ियां बहुत संकरी थीं। जो जिस मंजिल पर था, वहीं रह गया। इस अग्निकांड के गवाह बने लोगों ने जो दर्दनाक मंजर देखा, उसको उन्हीं की जुबानी पढ़िए… हादसा की रात घर के बाहर का माहौल पढ़िए… मोहल्ले के जेंट्स नमाज पढ़ रहे, पीछे से हादसा हो गया हम इकबाल के घर के सामने पहुंचे। पुलिस ने घर के नीचे का हिस्सा पीली पटि्टयां लगाकर सील किया हुआ था। कोई आ-जा नहीं सकता था। बाहर तक जले हुए कपड़े की बदबू आ रही थी। बहुत सारा कपड़ा लोगों ने निकालकर बाहर फेंका हुआ था, जिसका ढेर गली में दिख रहा था। घर के बाहर आग में जल चुके कपड़े का मलबा लगा हुआ था। पूरी गली में इसकी बदबू फैली हुई थी। जो लोग घर के बाहर दिखे, उनके चेहरों पर उदासी साफ दिख रही थी। हादसे के वक्त सिर्फ 50 कदम दूर लोग नमाज पढ़ रहे थे हम घर की सीढ़ियों पर बैठ गए। यहां हमारी मुलाकात इकबाल के 15 साल के भतीजे शहजादा से हुई। उसने कहा- मैंने ही सबसे पहले आग देखी थी। हमने पूछा- 23 फरवरी की शाम को क्या माहौल था, थोड़ा बताइए? वह कहते हैं- रमजान का महीना है, घर के सभी लोग रोजा रख रहे हैं, इसलिए शाम होने के बाद सभी जेंट्स घर से 50 कदम की दूरी पर बनी सुराही वाली मस्जिद में नमाज पढ़ने गए थे। पड़ोस के घरों से भी लोग नमाज पढ़ने गए थे। महिलाएं भी घरों में अंदर नमाज पढ़ रही थी, कुछ इफ्तारी के लिए खाना तैयार कर रही थीं। भतीजे बोले- मैं आग देखकर बदहवास हुआ, चिल्ला भी नहीं सका पूरी गली सुनसान थी, इसलिए किसी को आग लगने की आहट नहीं हुई। 3 घर छोड़कर मैं रहता हूं, मैं अपने घर से बाहर आया तो देखा कि इकबाल चाचा के घर से आग की लपटे निकल रही थीं। शहजादा कहते हैं- मैं भागकर घर के सामने पहुंचा। मेन डोर पर अंदर कुंडी लगी रहती है, अक्सर मैं कुंडी को बाहर से ही खोल लेता था, उस दिन भी मैंने कुंडी खोली। अंदर गया तो धुआं ही धुआं भरा दिखा। मैं सीढ़ियों से ऊपरी मंजिल पर जाने लगा, लेकिन धुआं इतना था कि मैं आधी सीढ़ी ही चढ़ पाया। मुझे समझ नहीं आया कि मैं चिल्लाऊं या फोन करके किसी को घटना की जानकारी दे दूं। बल्कि मैं बदहवास सा हो गया और खुद ही सबको बचाने के लिए भागने लगा। दो से तीन बार मैंने घर के ऊपरी मंजिल पर जाने का प्रयास किया, लेकिन मेरा भी दम घुटने लगा। मैं ऊपर नहीं जा सका। इसी बीच में रेस्क्यू का गोल्डन टाइम बीत गया। फिर मैंने शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया। लोगों ने आग देखी तब बचाव शुरू हुआ, लेकिन धुएं के कारण मेरा भी वहीं दम घुट गया और मैं बेहोश हो गया। जब होश आया तो मैंने खुद को अस्पताल में पाया। बुजुर्ग इकबाल बोले- 6 महीने पहले अब्बू का इंतकाल, अब परिवार तबाह हादसे में अपने परिवार के 6 लोगों को खो चुके इकबाल बेहद मायूस बैठे दिखे। इकबाल कहते हैं- सवा महीने पहले ही अब्बू हमें छोड़कर गए। हमें नहीं पता था कि इतना बड़ा कहर हम पर टूटेगा। मेरा पूरा परिवार, बहुएं, पत्नी, बेटे रोजे से हैं। हम तो सब नमाज पढ़ने मस्जिद गए थे। इबादत कर रहे थे, पीछे से ये हादसा हो गया। घर में आग बुझाने को दो सिलेंडर भी रखे हैं, लेकिन वो ऐसे ही रखे रह गए। किसी को समझ नहीं आया कि वो सिलेंडर से आग बुझा दे। उन मासूम बच्चों की क्या खता थी जो ये सजा मिली है। 2 बच्चों को खो चुकी साइरा बोली- मैं अभागी मां हादसे में रुखसार की जेठानी साइरा के दो बच्चों की जलकर मौत हुई है। उनकी 12 साल की बेटी और 9 साल का बेटा जल गए। साइरा रोजे रख रही है। अभी भी उसने रोजा नहीं तोड़ा। रोते हुए कहती हैं- मेरी बेटी 5वीं के पेपर दे रही थी। हादसे के रोज भी वो पेपर देकर आई थी। बच्चे घर में खेल रहे थे, इधर ये हादसा हो गया। अल्लाह ने ऐसा क्यों किया…। मुझे बच्चों का चेहरा भी देखने को नहीं मिला, कितनी मुश्किल से अल्लाह ने बच्चे दिए थे। वो भी छीन लिए। हम अपने बच्चों को देख भी नहीं पाए। रोते हुई साइरा को महिलाएं दिलासा दे रही हैं, उसे बार-बार अल्लाह पर भरोसा करने और सब्र रखने को कह रही हैं। लेकिन साइरा का रो रोकर बुरा हाल है। महिलाएं उसके सिर पर हाथ रखकर कलमा पढ़कर उसे दिलासा देने की कोशिश कर रही हैं। रुखसार के सीने से चिपकी थी दोनों बेटियां आसिम की पत्नी रुखसार, उनका 3 साल का बेटा अकदस, 6 महीने की जुड़वा बेटियां नबिया और इनायत और बेटे फारुक की मौत हो गई। आसिम के पिता इकबाल की बुजुर्ग पत्नी अमीर बानो झुलस गईं। आग बुझने के बाद फायर फाइटर अंदर दाखिल हुए। सेकेंड फ्लोर के कमरे में जब फायर फाइटर पहुंचे, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। पूरी तरह से जल चुकी रुखसार की बॉडी से चिपकी हुई 2 बेटियों की लाश मिली। ऐसा अनुमान लगाया गया कि घर में आग लगने के बाद रुखसार ने अपनी दोनों दुधमुंही बच्चियों को सीने से लगा लिया। धुएं से बचने के लिए उसने कमरे की कुंडी लगाकर सबको बंद किया। फिर अपना मुंह दुपट्टे से और तीसरी बेटी का मुंह हाथ से दबाया, ताकि धुआं मुंह में न जाए और वो बच जाएं। इस तरह सभी का दम घुटता चला गया, आग फैलती रही परिवार चीख भी नहीं पाया और मौत हो गई। अग्निकांड क्यों हुआ, 5 बड़ी लापरवाही 1. कपड़ों की बड़ी स्टोरेज, आग तेजी से फैली इकबाल के जिस तीन मंजिला घर में अग्निकांड हुआ, उसके ग्राउंड फ्लोर पर धागे से कपड़ा बनाया जाता था। इकबाल और उसके 5 बेटे टेक्सटाइल का काम करते हैं। ये रेजिडेंशियल इलाके में कपड़े की फैक्ट्री चला रहे थे। ग्राउंड फ्लोर में काफी तादात में कपड़ा, धागे स्टिचिंग मटेरियल था। उसमें आग लगी और फैलती चली गई। 2. पुराना शहर, गली बेहद संकरी, बचाव में देरी हुई इकबाल का मकान लिसाड़ी गेट, किदवई नगर में है। यह पुराने शहर का बेहद कंजेस्टेड इलाका है। गलियां संकरी हैं। मकान भी बिल्कुल सटकर बने हैं। घरों के छज्जे बहुत आगे सड़क तक निकले हैं। ऐसे में आग लगी तो फायर ब्रिगेड समय पर अंदर नहीं आ सकी, इसलिए आग बुझाने में देरी हुई और 6 मासूमों की जान चली गई। 3. घर की संकरी सीढ़ियां, लोग भाग नहीं सके अग्निकांड में मारी गई रुखसार की जेठानी साइरा ने बताया कि जिस 3 मंजिला घर में हादसा हुआ, वो 50 से 70 वर्ग गज एरिया में बना है। सिर्फ गली की ओर सामने वाले कमरों में खिड़कियां हैं, वो भी खुल नहीं पाती हैं। मकान की पहली, दूसरी मंजिल पर दो-दो कमरे हैं, किनारे से सीढ़ियां बनी हैं। इनसे एक बार में एक आदमी ही चढ़ सकता है। यही वजह है कि आग लगने के बाद लोग भाग नहीं सके। 4. हर फ्लोर पर जाल, उससे लपटें ऊपर की मंजिल तक पहुंचीं हादसे के वक्त सबसे पहले घर में शहजादा दाखिल हुआ था। उसने बताया कि मकान के हर मंजिल पर लोहे का बड़ा जाल बना है। ये वेंटीलेशन के लिए बने हैं। आग ग्राउंड फ्लोर पर लगी। कपड़ा आग पकड़ता रहा और लपटें ऊंची उठती रहीं। इसी जाल से निकलकर लपटें तुरंत पहली फिर दूसरी मंजिल तक तेजी से पहुंच गईं। 5. घर में 2 फायर हाईड्रेंट, चलाना किसी को नहीं आता हादसे के वक्त घर में कोई जेंट्स नहीं था, सिर्फ महिलाएं और बच्चे थे। आग जिस ग्राउंउ फ्लोर पर लगी, वहां 2 फायर हाईड्रेंट लगे थे। मगर किसी को इन्हें ऑपरेट करना नहीं आता था। जो लोग बाहर से बचाने आए, उन्हें भी वो सिलेंडर इस्तेमाल करना नहीं आता था। यही वजह है कि आग फैलती गई। पूरी गली में फैल सकती थी आग लोगों का कहना था- इकबाल के घर के सामने और आसपास के घरों में कपड़े का काम ही होता है। हर दूसरे घर में कपड़े का स्टॉक है। घर छत से नीचे तक सटे हुए हैं। ऐसे में इकबाल के घर की आग थोड़ी देर में दूसरे घरों में फैलकर और भी बड़ी हो सकती थी। गनीमत रही कि आग को जल्दी काबू कर लिया गया। 1 हजार लीटर पानी भी आग नहीं बुझा सका मकान में इस्तेमाल के लिए 1 हजार लीटर की पानी की टंकी रखी थी। फायर ब्रिगेड की मदद पहुंचने से पहले पड़ोसियों, लोगों ने मिलकर उस टंकी से पानी डालकर आग बुझाना शुरू किया। टंकी खाली हो गई, मगर आग पर काबू नहीं पाया जा सका। पूरा परिवार जिंदा जलकर मर गया। पड़ोसियों को जैसे ही आग का पता चला, तुरंत सभी दौड़कर जमा हो गए। कुछ लोगों ने मकान के अंदर जाने का प्रयास किया, लेकिन धुआं इतना ज्यादा था कि मकान में घुसना मुश्किल हो रहा था। अंदर आग की लपटें और धुआं दोनों था। जब लोगों को लगा वो सीढ़ी के रास्ते अंदर नहीं जा सकते, परिवार ऊपर की मंजिलों पर फंसा है, तो फौरन छतों और सामने वाले मकान के जरिए सीढ़ी लगाकर खिड़की के जरिए घर की पहली, दूसरी मंजिल पर दाखिल हुए। अंदर कमरे में जाकर महिलाओं, बच्चों को हाथों से ही बाहर निकालना शुरू किया। छत पर रखी पानी की टंकी से पानी फेंकना शुरू किया ताकि आग बुझ सके। महिलाओं, बच्चों को निकाला। एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस को भी मौके पर बुलाया। पड़ोसियों ने ही घायलों को गोद में उठाकर भागते हुए उन्हें सड़क पर एंबुलेंस तक पहुंचाया। अब CFO की पूरी बात 10 मिनट में गाड़ियां पहुंचीं, 2 घंटे बुझाने में लगे चीफ फायर ऑफिसर सुरेंद्र कुमार सिंह ने बताया- कॉल पर हमें सूचना मिलने के महज 10 मिनट में फायर ब्रिगेड की 2 गाड़ियां मौके पर पहुंची। आग ज्यादा थी, इसलिए 2 अन्य गाड़ियों को तुरंत मौके पर बुलाया गया। लेकिन तंग गलियां होने के कारण दमकल गाड़ियों का अंदर जाना मुश्किल था। तो फौरन 2 फायर बाइक्स को मौके पर भेजा गया। 15-20 मिनट तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला। आग बुझाने में लगभग 2 घंटे का वक्त लगा। क्योंकि आग इतनी फैल चुकी थी कि काबू पाने में काफी समय लगा। बताया कि शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी है। चूंकि घर में पॉलिस्टर कपड़े का स्टॉक था। पॉलिस्टर कपड़ा सबसे बर्निंग स्टफ है, इसकी वजह से आग तेजी से फैली और पूरे घर को घेर लिया। नीचे का फ्लोर पूरी तरह काला हो चुका था। मकान के अंदर ऊपर तक की दीवारें काली हो चुकी थी। इसलिए आग का फोकस स्टार्टिंग प्वाइंट क्या रहा होगा? सबसे पहले किसमें आग लगी? ये भी नहीं बताया जा सकता। इस घटना के बाद फायर डीजी ने विभाग को किदवई नगर, बुनकर नगर सहित शहर के अन्य ऐसे इलाके जहां ऐसे हादसे हो सकते हैं वहां फायर ऑडिट करने का भी निर्देश दिया है। --------------------------- ये भी पढ़ें: मेरठ में परिवार के 6 लोग घर में जिंदा जले:इनमें जुड़वां बेटियों समेत 5 बच्चे; एक साथ उठा सभी का जनाजा, कांधा देने उमड़ा शहर मेरठ में कपड़ा कारोबारी के परिवार के 6 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई। इनमें जुड़वां बेटियों समेत 5 बच्चे हैं। कारोबारी पिता सोमवार देर शाम नमाज पढ़ने गए थे, तभी तीन मंजिला मकान में भीषण आग लग गई। उस वक्त घर में महिलाएं, बच्चों समेत 12 लोग थे। ग्राउंड फ्लोर में लगी आग इतनी तेजी से फैली कि किसी को बाहर निकलने का वक्त नहीं मिला। पढ़िए पूरी खबर...
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