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वेस्ट को क्या मिल सकता है तीसरा डिप्टी सीएम:पूर्वांचल के प्रभाव को बैलेंस करने पार्टी ले सकती है निर्णय, ब्राम्हण वर्ग की नाराजगी दूर करेंगे
Feb 23, 2026
यूपी में योगी मंत्रिमंडल 2.0 के विस्तार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सोमवार को दिल्ली में डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से मुलाकात की। इसको लेकर पार्टी के अंदरखाने में संगठनात्मक फेरबदल की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है। ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा अगले एक महीने के अंदर प्रदेश संगठन की नई टीम घोषित कर सकती है, जिसमें जिला कमेटियों से लेकर क्षेत्रीय अध्यक्षों तक बड़े बदलाव संभव हैं। विधानसभा चुनाव और पंचायत चुनाव को ध्यान में रखते हुए भाजपा नए सामाजिक समीकरणों के आधार पर टीम को संतुलित करने की तैयारी में है। उम्मीद है कि मंत्रिमंडल विस्तार में कई मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। करीब 15 विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। राजनीतिक गलियारों में एक चर्चा यह भी है कि पार्टी तीसरे डिप्टी सीएम पद पर भी फैसला ले सकती है। पूर्वांचल के प्रभाव को संतुलित करने के लिए पश्चिमी यूपी से किसी नेता को राज्य का तीसरा उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। इसको लेकर पार्टी के अंदरखाने में सुगबुगाहट तेज हैं। इसके साथ ही पार्टी ब्राह्म्ण वर्ग की नाराजगी भी दूर करने की कोशिश में है। भाजपा पश्चिमी यूपी की संगठनात्मक कमान किसी ब्राह्मण चेहरे को सौंपने पर विचार कर रही है। बीजेपी पश्चिमी यूपी से अपना तीसरा डिप्टी सीएम क्यों बना सकती है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सबसे पहले जानिए पार्टी में अभी की क्या स्थिति है?
उत्तर प्रदेश की सत्ता और संगठन दोनों में पूर्वांचल का प्रभाव ज्यादा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी तीनों पूर्वांचल से आते हैं। ऐसे में सरकार और संगठन दोनों का पावर सेंटर पूर्वांचल तक सिमटा हुआ है। दूसरे उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक अवध क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, फिर भी पश्चिम और ब्रज क्षेत्र के लोग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। कई बार पार्टी की बड़े नेता इस बात को जनसभाओं में उठा चुके हैं और उनकी मांग है कि पश्चिम यूपी से संगठन और सरकार में बड़ा पद मिलना चाहिए। इसी कड़ी में भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पश्चिम उत्तर प्रदेश में बड़ा राजनीतिक संतुलन साधने की तैयारी में जुटी है। क्षेत्रीय और जातीय असंतुलन के उठते सवालों के बीच पार्टी सोशल इंजीनियरिंग के जरिए पश्चिम को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी के सामने एक चुनौती यह भी मानी जा रही है कि पश्चिम यूपी में ऐसे प्रभावशाली नेताओं की कमी महसूस की जा रही है, जो नौकरशाही के सामने मजबूती से अपनी बात रख सकें और उसे मनवा सकें। पहले भूपेंद्र चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष रहने के दौरान पश्चिम संगठन का अहम केंद्र था, लेकिन अब वह स्थिति नहीं रही। इसी कड़ी में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को फिर से कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। पश्चिम यूपी को नहीं मिलती पर्याप्त तवज्जो
भाजपा के एक विधायक ने बिना नाम छापने की शर्त पर बताया कि हर छोटी-मोटी बात के लिए लखनऊ जाना संभव नहीं है। वहां भी मुख्यमंत्री से मिलना आसान नहीं होता। पश्चिम यूपी में नौकरशाही विधायकों को इसलिए महत्व नहीं देती, क्योंकि यहां ऐसे नेता नहीं हैं जो सीधे फोन पर मुख्यमंत्री से मुद्दा रख सकें। जबकि पूर्वी यूपी में ऐसे नेता पर्याप्त हैं। इसलिए अब जरूरी है कि पश्चिम को उसका उचित हक मिले। 2 ब्राह्मण नेता बनेंगे क्षेत्रीय अध्यक्ष
वहीं, प्रदेश में ब्राह्मणों के बढ़ते आक्रोश को शांत करने के लिए भाजपा पश्चिम यूपी यानी जाट लैंड की बागडोर किसी ब्राह्मण नेता के हाथों में सौंप सकती है। एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने बताया- पार्टी यूपी के 6 क्षेत्रों में से दो क्षेत्रों में ब्राह्मण क्षेत्रीय अध्यक्ष नियुक्त कर सकती है। पश्चिम यूपी की संगठनात्मक जिम्मेदारी किसी ब्राह्मण नेता को सौंपना लगभग तय माना जा रहा है, जबकि इस बारे में कई नामों पर चर्चाएं हैं। -------------------
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