जौनपुर में कांग्रेस पार्टी ने बुधवार दोपहर कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार सिंह के नेतृत्व में दो दर्जन से अधिक कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट इंद्र नंदन सिंह को सौंपा। डॉ. प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि यह प्रदर्शन ज्योतिमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्यों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के विरोध में था। उन्होंने एफआईआर रद्द करने और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। सिंह ने आरोप लगाया कि मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य और उनके शिष्यों को स्नान करने से रोका गया और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ शिष्यों की पुलिस द्वारा चोटी खींचकर पिटाई की गई और उन्हें अपमानित किया गया। इस घटना के बाद शंकराचार्य, उनके शिष्यों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, जिसे कांग्रेस ने प्रथम दृष्टया एकतरफा और दुर्भावनापूर्ण बताया। कांग्रेस ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार देते हैं। शंकराचार्य का पद सनातन परंपरा में सर्वोच्च आध्यात्मिक पदों में से एक है। पार्टी ने इस कार्रवाई को धार्मिक स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक मूल्यों और हिंदू धर्म की मान्यताओं के विपरीत बताया। पार्टी ने मांग की कि शंकराचार्य और उनके शिष्यों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की जाए। इसके साथ ही, एफआईआर दर्ज कराने वाले व्यक्तियों की पृष्ठभूमि और उनके संभावित उद्देश्यों की भी जांच होनी चाहिए। कांग्रेस ने शिष्यों के साथ कथित अभद्रता और अपमानित करने की घटना की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों या व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की। इसका उद्देश्य भविष्य में धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक निर्देश जारी करना है।