ललितपुर में बुधवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर कथित उत्पीड़न के विरोध में कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। उन्होंने जिलाधिकारी सत्य प्रकाश को प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई। ज्ञापन में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के कथित उत्पीड़न पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। इसमें कहा गया है कि वर्तमान सरकार आलोचना और सही सुझावों को सुनने के बजाय उन्हें दबाने का कार्य कर रही है। सरकार के विरुद्ध मुखर होकर अपनी बात रखने वाले ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य और उनके शिष्यों को अनावश्यक रूप से परेशान और प्रताड़ित किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, कुंभ के दौरान मौनी अमावस्या के पुण्य अवसर पर पुलिस द्वारा शंकराचार्य और उनके शिष्यों को स्नान करने से रोका गया था। उनके साथ आए साधुओं के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार भी किया गया। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि अब शंकराचार्य, उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी सहित कई अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ यौन शोषण के आरोप में एफआईआर दर्ज कराए जाने से मामला और गंभीर हो गया है। ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का हवाला देते हुए कहा गया कि ये प्रावधान धार्मिक स्वतंत्रता तथा धार्मिक संप्रदायों को अपने धार्मिक मामलों के प्रबंधन का मौलिक अधिकार प्रदान करते हैं। कांग्रेसजनों ने कहा कि शंकराचार्य का पद सनातन परंपरा में सर्वोच्च आध्यात्मिक पदों में से एक माना जाता है, जिसकी मान्यता ऐतिहासिक धार्मिक परिपाटियों से निर्धारित होती है। जिला कांग्रेस कमेटी ने मांग की है कि एफआईआर दर्ज कराने वाले व्यक्तियों की पृष्ठभूमि, परिस्थितियों और संभावित प्रेरक तत्वों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सत्य सामने आ सके। साथ ही उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से अनुरोध किया कि शंकराचार्य और उनके शिष्यों का कथित उत्पीड़न तत्काल प्रभाव से रोका जाए और उन्हें न्याय दिलाया जाए। ज्ञापन सौंपते समय मनरेगा बचाओ संघर्ष समिति के जिला प्रभारी सरदार जसपाल सिंह बंटी, पूर्व जिलाध्यक्ष बलवंत लोधी, नगर अध्यक्ष रामनरेश तिवारी, महिला अध्यक्ष नेहा तिवारी, अजय तोमर, महामंत्री शशिकांत दीक्षित, आशाराम तिवारी, कुलदीप पाठक, प्रेम भैया नामदेव, असलम, राहुल सेन, आसिफ खान और दीपक सहित अनेक कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद रहे।