हाथरस में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विरुद्ध पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज प्राथमिकी में निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर किया गया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष विवेक उपाध्याय के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि न्यायालय और विधिक प्रक्रिया का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है, लेकिन इस प्रकरण की परिस्थितियों ने समाज में अनेक प्रश्न और आशंकाएं उत्पन्न कर दी हैं। स्वामी जी द्वारा पूर्व में विभिन्न सार्वजनिक विषयों पर व्यक्त विचारों के बाद उत्पन्न घटनाक्रम के संदर्भ में व्यापक जनचर्चा हो रही है। कांग्रेस ने मांग की है कि प्रकरण की जांच पूर्णतः स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से कराई जाए, ताकि सत्य तथ्यों के आधार पर न्याय सुनिश्चित हो सके। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 धार्मिक स्वतंत्रता एवं धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन का अधिकार प्रदान करते हैं।ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि शंकराचार्य का पद सनातन परंपरा में अत्यंत सम्मानित और सर्वोच्च आध्यात्मिक स्थान रखता है। अतः यह अपेक्षित है कि किसी भी जांच प्रक्रिया में गरिमा, निष्पक्षता और विधि के शासन का पूर्ण पालन हो तथा किसी प्रकार की राजनीतिक दुर्भावना या प्रतिशोध की भावना का स्थान न हो। कांग्रेस ने मांग की कि उक्त प्रकरण की स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय जांच सुनिश्चित कराई जाए। जांच प्रक्रिया पारदर्शी हो तथा तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष प्रस्तुत किए जाएं। धार्मिक स्वतंत्रता एवं आध्यात्मिक संस्थाओं की गरिमा की रक्षा की जाए और कानून का उपयोग असहमति या आलोचना को दबाने के साधन के रूप में न किया जाए। इस मौके पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष विवेक उपाध्याय के अलावा मुकेश चंद्रा, ब्रह्मदेव शर्मा, शशांक पचौरी, अशोक कुमार गुप्त, सचिन उपाध्याय, गोविंद शरण चतुर्वेदी, दुष्यंत चौधरी, नवीन कुमार शर्मा, अवधेश बक्शी, अजीत गोस्वामी, देवेंद्र शर्मा, रामकुमार सारस्वत, कृपेंद्र सिंह सहित अन्य कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद थे।
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