जिला कांग्रेस कमेटी ने बुधवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। यह प्रदर्शन प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर जिलाध्यक्ष गोपाल कुलश्रेष्ठ के नेतृत्व में किया गया। ज्ञापन में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्यों पर दर्ज एफआईआर को झूठा बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। सरकार पर लगाया दबाव की राजनीति का आरोप जिलाध्यक्ष गोपाल कुलश्रेष्ठ ने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार सही बात सुनना नहीं चाहती और जो भी सरकार के खिलाफ मुखर होता है, उसे दबाने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की हठधर्मिता के कारण शंकराचार्य और उनके शिष्यों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। माघ मेले की घटना का जिक्र कुलश्रेष्ठ के अनुसार, यह घटना माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या पर हुई थी। जब शंकराचार्य अपने शिष्यों के साथ प्रयागराज स्नान के लिए जा रहे थे, तब पुलिस ने उन्हें रोक दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिष्यों के साथ मारपीट की गई और उन्हें थाने ले जाकर अपमानित किया गया। कुलश्रेष्ठ ने कहा कि यह सब सरकार के इशारे पर हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि घटना के विरोध के बाद सरकार और अधिक नाराज हो गई और शंकराचार्य से उनके पद का प्रमाण पत्र मांगा गया। उन्होंने इसे सनातन परंपरा का अपमान बताया। कुलश्रेष्ठ ने मुख्यमंत्री पर भी टिप्पणी करते हुए आरोप लगाए और कहा कि सरकार ऐसे व्यक्तियों को संरक्षण दे रही है, जिन पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। ज्ञापन में कहा गया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 धार्मिक स्वतंत्रता तथा धार्मिक संप्रदायों को अपने धार्मिक मामलों के प्रबंधन का मौलिक अधिकार प्रदान करते हैं। कांग्रेस ने एफआईआर दर्ज कराने वाले व्यक्तियों की पृष्ठभूमि और परिस्थितियों की पारदर्शी जांच की मांग की है। जिलाध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से मामले की सीबीआई जांच कराने और झूठे मुकदमे दर्ज कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस दौरान वरिष्ठ उपाध्यक्ष भीमसेन कठेरिया, अरविंद यादव, सुखवीर यादव, अनुपम शाक्य, डॉ. नवीन शर्मा, हिमांशु सेन, कुमार गौरव खेड़ा, नकुल शाक्य, सुधीर यादव, वासिफ अली, अंकुर कुमार और मोहम्मद नदीम सहित कई कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद रहे।