कानपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती पर दर्ज मुकदमे को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर कांग्रेसियों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन एसीएम को सौंपा। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और हाथों में घंटा, घड़ियाल व डमरू बजाकर विरोध जताया। बुधवार को जिला कांग्रेस ग्रामीण इकाई के कार्यकर्ता जिला अधिकारी कार्यालय पहुंचे। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज की तस्वीरें हाथ में लेकर कांग्रेसियों ने जमकर नारे लगाए। ग्रामीण जिला अध्यक्ष संदीप शुक्ला के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि स्वामी जी के खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे की टाइमिंग संदिग्ध है और इसकी निष्पक्ष व गहन जांच कराई जानी चाहिए। शंकराचार्य की छवि धूमिल करने का प्रयास संदीप शुक्ला ने कहा- जिस व्यक्ति ने मुकदमा दर्ज कराया है, उसका खुद का अतीत विवादित रहा है। उनका आरोप है कि स्वामी जी लगातार गौ-हत्या के विरोध में आवाज उठाते रहे हैं और माघ मेले में बटुकों के साथ हुई मारपीट की घटना का भी विरोध कर रहे थे। ऐसे में यह मुकदमा उनकी आवाज दबाने के उद्देश्य से दर्ज कराया गया हो सकता है। उन्होंने कहा- आम जनमानस में भी इस मामले को लेकर शंका है और लोगों को आशंका है कि शंकराचार्य की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। जांच के लिए एसआईटी गठित की जाए ज्ञापन के माध्यम से प्रधानमंत्री से मांग की गई है कि इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया जाए। कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने मांग कि इस एसआईटी में उन राज्यों के अधिकारियों को शामिल किया जाए जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार नहीं है, ताकि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से हो सके। उन्होंने केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के अधिकारियों को शामिल करने की मांग की, जिससे सच्चाई सामने आ सके।