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शहीद का शव देख मां बोलीं- चेहरा क्यों ढका है:अयोध्या में शव से लिपटकर फूट-फूटकर रोई, तबीयत बिगड़ने से हुई थी मौत
Feb 24, 2026
अयोध्या में मंगलवार को सेना में सूबेदार रहे देवेश सिंह का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। तिरंगे में लिपटे बेटे को देखकर पिता खुद को संभाल नहीं सके। मुखाग्नि देने से पहले वह शव से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़े। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और पूरे इलाके में ‘देवेश अमर रहे’ के नारे गूंजते रहे। देवेश सिंह की लेह-लद्दाख में ड्यूटी के दौरान तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें इलाज के लिए दिल्ली में भर्ती कराया गया था। बीते शनिवार को इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई। सोमवार की रात में जवान का शव थाना बाबा बाजार के हंसराजपुर पूरे विशेन गांव लाया गया। शव देखकर परिजन फूट-फूटकर रोने लगे। वे शव से लिपट गए। घरवाले बार-बार कह रहे थे कि वह उन्हें छोड़कर नहीं जा सकते। मां ने कहा, “चेहरा क्यों ढक कर रखा है। कफन हटा दो। बेटे का एक बार चेहरा दिखा दो।” अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ शहादत की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। देवेश का शव घर के बाहर रखा गया। लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उसके बाद उनके पिता से बात की। उनसे घटना की जानकारी ली। उन्हें सांत्वना दी। बेटे को याद कर घरवाले बार-बार बिलख रहे थे। पिता बोले- बेटा बचपन से देश की सेवा करना चाहता था पिता रमेश सिंह ने बताया- देवेश बचपन से ही देश सेवा करना चाहता था। घरवालों को अपनी इच्छा बताई थी। परिवार के लोग भी उसके साथ थे। जब उसे सेना में नौकरी मिली थी तो पूरे गांव के लोग बहुत ज्यादा खुश थे। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि बेटा इतनी जल्दी उन्हें छोड़कर चला जाएगा। देवेश तीन बहनों में इकलौते भाई थे। दो बहनों की शादी हो चुकी है। जबकि छोटी बहन पढ़ाई कर रही है। मां बोलीं- इतनी जल्दी बेटा साथ छोड़ा देगा सोचा नहीं था मां ने कहा- देवेश घर का दुलारा था। सभी उसे बहुत प्यार करते थे। वह सभी के साथ हसंते खेलते रहता था। उसका बचपन से ही सपना था कि देश की सेवा करे। वह हमेशा कहता था मां मैं एक दिन बड़ा आदमी बनूंगा। उसने छुट्टी लेकर जल्द घर आने की बात कही थी, लेकिन इतनी जल्दी साथ छोड़ देगा सोचा नहीं था। 28 जनवरी को बिगड़ी थी तबीयत परिजनों के अनुसार- देवेश सिंह आठ साल से भारतीय सेना में तैनात थे। 28 जनवरी को लेह-लद्दाख में तैनाती के दौरान देवेश सिंह की तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें जम्मू-कश्मीर के सैनिक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में हालत गंभीर होने पर उन्हें दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रेफर किया गया था। शनिवार रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी।
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