शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने IPS डॉ. अजय पाल शर्मा पर आशुतोष ब्रह्मचारी के साथ मिलकर साजिश रचने का आरोप लगाया। शंकराचार्य ने एक फोटो सार्वजनिक की है। जिसमें आईपीएस अजय पाल, उनके खिलाफ केस दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी के साथ केक काटते नजर आ रहे हैं। शंकराचार्य का आरोप है कि उनकी गिरफ्तारी की स्क्रिप्ट लिखने के पीछे इसी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अफसर का हाथ है। दरअसल, शंकराचार्य ने जिन आशुतोष ब्रह्मचारी पर आईपीएस के साथ मिलकर साजिश रचने का आरोप लगाया है, उन आईपीएस अधिकारी ने ही शामली एसपी रहते हुए आशुतोष ब्रह्मचारी को जेल भेजा था। डेंटिस्ट से 2011 में आईपीएस बने अजय पाल शर्मा को 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' के नाम से भी जाना जाता है। वह 15 साल के करियर में 500 से अधिक एनकाउंटर हो चुके हैं। इनमें 15 अपराधी मारे गए, जबकि अन्य गिरफ्तार किए गए। 22 महीने में किए 136 एनकाउंटर पंजाब के लुधियाना के रहने वाले डॉ. अजय पाल शर्मा आईपीएस बनने से पहले डेंटल सर्जन थे। उन्होंने पटियाला के सरकारी मेडिकल कॉलेज से बीडीएस (डेंटल साइंसेज) की डिग्री ली थी। उनके छोटे भाई अमित पाल शर्मा एक आईएएस अधिकारी हैं। 41 साल के अजय पाल अभी प्रयागराज में एडिशनल सीपी (लॉ एंड ऑर्डर) के पद पर तैनात हैं। इससे पहले वह पांच जिलों में एसपी/एसएसपी रह चुके हैं। जौनपुर में बतौर एसपी अपने 22 महीने के कार्यकाल में उन्होंने रिकॉर्ड 136 एनकाउंटर किए। यह किसी भी जिले में एक एसपी के कार्यकाल में हुई मुठभेड़ों की संख्या के मामले में सबसे अधिक है। इन जिलों की संभाली कमान वह हाथरस, शामली, गाजियाबाद, रामपुर और जौनपुर के कप्तान रह चुके हैं। वर्ष 2013 में प्रयागराज में आयोजित कुंभ मेले में बतौर एएसपी तैनात रहे। पुलिस मुख्यालय में एसपी कार्मिक और यूपी-112 के कप्तान के रूप में भी उन्हें जिम्मेदारी दी गई। महिला ने लगाए थे गंभीर आरोप अजय पाल शर्मा का करियर केवल सफलताओं से ही नहीं, बल्कि विवादों से भी भरा रहा है। 2020 में दीप्ति शर्मा नाम की एक महिला ने उन पर गंभीर आरोप लगाए थे। महिला का दावा था कि अजय पाल ने उनसे 2016 में शादी की थी और बाद में मुकर गए। इस मामले ने इतना तूल पकड़ा कि लखनऊ के हजरतगंज थाने में उनके खिलाफ FIR दर्ज हुई और एसआईटी जांच भी बैठी। इसी विवाद के चलते उनका प्रमोशन भी लंबे समय तक अटका रहा, हालांकि बाद में उन्हें क्लीन चिट मिल गई। महाकुंभ में नोडल अधिकारी रहे महाकुंभ से ठीक पहले उन्हें प्रयागराज में नोडल अधिकारी (महाकुंभ, कमिश्नरेट प्रयागराज) के पद पर तैनात किया गया। 22 दिसंबर 2024 को उन्हें एडिशनल सीपी प्रयागराज बनाया गया। इस दौरान महाकुंभ के सफल आयोजन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। महाकुंभ के बाद उन्हें एडिशनल सीपी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रयागराज का दायित्व सौंपा गया। पहले शंकराचार्य के आरोप में अजय पाल का नाम नहीं था मौनी अमावस्या के दिन संगम तट पर हुए विवाद के दौरान अन्य अधिकारियों के साथ अजय पाल शर्मा भी वहां मौजूद थे। अधिकारियों की भीड़ में वह सबसे आगे लाउड हेलर लेकर बार-बार शंकराचार्य और उनके समर्थकों से आने-जाने के रास्ते को खाली करने का अनुरोध करते नजर आए। हालांकि मौनी अमावस्या के बाद 19 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में शंकराचार्य ने विवाद पर अपनी बात रखी। उन्होंने जिले के अधिकारियों के नाम और फोटो दिखाए, उनमें डॉ. अजय पाल शर्मा का नाम शामिल नहीं था। अजय पाल करीब डेढ़ साल तक शामली में तैनात रहे अजय पाल शर्मा को 17 अक्टूबर 2016 को तत्कालीन सपा सरकार ने एसपी शामली नियुक्त किया गया था। मार्च 2018 तक वह तैनात रहे। आशुतोष पांडे उर्फ आशुतोष ब्रह्मचारी शामली के कांधला थाने का हिस्ट्रीशीटर है। उस पर कुल 21 मुकदमे दर्ज हैं। अजय पाल शर्मा ने ही आशुतोष ब्रह्मचारी को जेल भेजा था। एडिशनल सीपी लाॅ एंड आर्डर आईपीएस डॉ.अजयपाल शर्मा कहा- कोर्ट के आदेश पर मुकदमा लिखा किया गया है। निष्पक्ष तरीके से जांच कराई जा रही है। जो साक्ष्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। शंकराचार्य की ओर से लगाए गए आरोपों पर किसी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें शंकराचार्य बोले- हिंदुत्व खतरे में है:सिर्फ ड्रेस पहनकर खुद को हिंदू बता रहे; प्रयागराज पुलिस ने काशी में डेरा जमाया शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ बच्चों के यौन शोषण मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद प्रयागराज पुलिस पिछले तीन दिनों से वाराणसी में डेरा डाले हुए है। पुलिस उनसे पूछताछ कर सकती है, हालांकि अभी तक आश्रम नहीं पहुंची है। सूत्रों के मुताबिक, प्रयागराज पुलिस फिलहाल शंकराचार्य से जुड़े सबूत जुटाने में लगी है। पढ़िए पूरी खबर
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