प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग कर रहे अधिवक्ताओं की पुलिस से नोकझोंक हुई। अधिवक्ता प्रधानमंत्री से मिलने जा रहे थे, लेकिन उन्हें रोक दिया गया। वे भाजपा सरकार पर पश्चिमी यूपी को हाईकोर्ट बेंच न देने का आरोप लगा रहे हैं। यह घटना तब हुई जब प्रधानमंत्री मोदी ने नमो भारत और मेट्रो को हरी झंडी दिखाई। अधिवक्ताओं ने पहले प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा था, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें अनुमति नहीं दी। इसके बाद, अधिवक्ता नानक चंद सभागार में एकत्र हुए और आम नागरिक के रूप में रैली में शामिल होने जा रहे थे, तभी पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। अधिवक्ताओं ने पुलिसकर्मियों से तीखी बहस की। उनका कहना था कि केंद्र और प्रदेश दोनों में भाजपा की सरकार होने के बावजूद पश्चिमी उत्तर प्रदेश को हाईकोर्ट बेंच नहीं मिल रही है। वे पिछले कई वर्षों से हाईकोर्ट बेंच के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अधिवक्ताओं ने याद दिलाया कि जब भाजपा विपक्ष में थी, तब उसने सरकार में आने पर पश्चिमी यूपी को हाईकोर्ट बेंच देने का वादा किया था। हालांकि, उनका आरोप है कि 'पूरब की राजनीति' हावी होने के कारण यह मांग पूरी नहीं हो पा रही है। अधिवक्ताओं ने कहा कि अब उनकी लड़ाई सरकार से 'आर-पार' की है। उन्होंने एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री से मिलने का आह्वान किया था, ताकि सस्ते और सुलभ न्याय के लिए हाईकोर्ट बेंच की मांग की जा सके। उनका तर्क है कि पश्चिमी क्षेत्र के लोगों को न्याय के लिए 800 किलोमीटर दूर इलाहाबाद हाईकोर्ट जाना पड़ता है, जिससे आम जनता और अधिवक्ताओं दोनों को परेशानी होती है। उन्होंने यह भी बताया कि मेरठ से पाकिस्तान के लाहौर की दूरी इलाहाबाद की दूरी से कम है। अधिवक्ताओं ने पूर्व में मुख्यमंत्री से मिलकर भी अपनी समस्या रखी थी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का बहिष्कार करेंगे। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा पदाधिकारी लगातार आश्वासन देते हैं, लेकिन प्रदेश सरकार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नेताओं की कोई मांग पूरी नहीं कर रही है। आज भी उन्हें प्रधानमंत्री मोदी से शांतिपूर्ण तरीके से मिलने नहीं दिया गया।