कुशीनगर का स्वशासी मेडिकल कॉलेज एक बार फिर स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि यहां हड्डी रोग विशेषज्ञ 24 घंटे उपलब्ध नहीं रहते, जिसके कारण फ्रैक्चर और गंभीर चोट के मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अस्पताल में 24 में से लगभग 16 घंटे हड्डी रोग विशेषज्ञ मौजूद नहीं होते। ओपीडी समय समाप्त होने के बाद मेडिकल कॉलेज में कोई भी हड्डी रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं रहता। इस स्थिति में आपातकालीन मरीजों को या तो प्राथमिक उपचार देकर अगले दिन आने की सलाह दी जाती है, या फिर उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर कर दिया जाता है। हाल ही में बंगाली पट्टी से आई एक महिला के परिजनों ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि घर पर काम करते समय महिला के हाथ में चोट लग गई थी। फ्रैक्चर की आशंका के चलते वे दोपहर में मेडिकल कॉलेज पहुंचे, लेकिन इमरजेंसी में उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। पर्ची बनवाने और एक्स-रे के बाद भी विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे, जिसके कारण महिला को केवल दर्द का इंजेक्शन देकर अगले दिन हड्डी रोग विशेषज्ञ से दिखाने की सलाह दी गई। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिल चुका है, तो यहां 24 घंटे विशेषज्ञ सेवाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए। सड़क दुर्घटनाओं और हड्डी से संबंधित चोटों के बढ़ते मामलों को देखते हुए डॉक्टरों की अनुपलब्धता एक गंभीर चिंता का विषय है। इस संबंध में प्रभारी सीएमएस डॉ. दिलीप कुमार ने बताया कि हड्डी रोग विशेषज्ञ ओपीडी समय में उपलब्ध रहते हैं। ओपीडी के बाद आने वाले मरीजों को इमरजेंसी में प्राथमिक उपचार और दर्द नियंत्रण की सुविधा प्रदान की जाती है, और अगले दिन विशेषज्ञ द्वारा उनका उपचार किया जाता है। यह देखना होगा कि क्या मेडिकल कॉलेज में 24 घंटे विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कोई व्यवस्था की जाएगी, ताकि गंभीर मरीजों को समय पर उचित इलाज मिल सके।