May 23, 2024

इलेक्टोरल ट्रस्ट और इलेक्टोरल इलेक्टोरल बॉन्ड पर ट्वीट थ्रेड पढ़िए

March 19, 2024
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ये ट्विटर के माध्यम से इलेक्ट्रॉल बॉन्ड पर दी गई जानकारी है।

31 जनवरी 2013. तत्कालीन कांग्रेस सरकार एक नोटिफिकेशन निकालती है। कंपनीज एक्ट 1956 की धारा 25 के तहत रजिस्टर्ड कोई भी कंपनी इलेक्टोरल ट्रस्ट बना सकती है। ट्रस्ट को मिलने वाले पैसे का 95 फीसदी राजनीतिक दलों को दान करना पड़ेगा। ट्रस्ट को हर साल यह बताना होगा कि उसने किससे पैसा लिया और किस पार्टी को दिया. इस नोटिफिकेशन के बाद कई कारोबारी घरानों ने चुनावी ट्रस्ट बनाए।

 

इन चुनावी ट्रस्ट में सबसे बड़ा ट्रस्ट प्रूडेंट है। इसे 2017 से पहले सत्या इलेक्टोरल ट्रस्ट के नाम से जाना जाता था। यह कितना बड़ा इसका अंदाजा एक आंकडे से लगाइए। वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2022-23 के बीच सभी चुनावी ट्रस्ट ने मिलकर 1995 करोड़ की फंडिंग राजनीतिक दलों को की। इसमें

अकेले प्रूडेंट का हिस्सा 1695 करोड़ था. एयरटेल ग्रुप की मिलकियत वाली प्रूडेंट ट्रस्ट का बीजेपी की तरफ झुकाव साफ़ देखा जा सकता है. अप्रैल 2017 से मार्च 2023 के बीच प्रूडेंट ने 1695 करोड़ में से 1239 करोड़ बीजेपी को दिए. यह इलेक्टोरल बांड के बाद पार्टी को मिली सबसे बड़ी फंडिंग है

आप अगर इलेक्टोरल बांड और इलेक्टोरल ट्रस्ट के डाटा का मिलान करेंगे तो साफ़ होगा बड़े कारोबारी घराने राजनीतिक दलों को फंड करने के लिए हर उपलब्ध माध्यम का इस्तेमाल कर रहे थे.

मेघा इंजीनियरिंग ने वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए राजनीतिक दलों को 193 करोड़ का चंदा

इसी साल कंपनी ने प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट में 87 करोड़ का योगदान दिया. इसी तरह से वित्तीय वर्ष 20-21 के दौरान मेघा इंजीनियरिंग ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 20 करोड़ रूपए का चंदा दिया. इसी साल कंपनी ने प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट में 22 करोड़ का योगदान किया गया.

अप्रैल 2019 से जनवरी 2024 के बीच मेघा इंजीनियरिंग ने 966 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड ख़रीदे. इसी दौरान इस कंपनी की एक और सब्सिडरी कंपनी वेस्टर्न यूपी पॉवर ट्रांसमिशन ने 200 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे. कुल मिलाकर मेघा इन्जीनरिन्ग की तरफ से अप्रैल 2019 से जनवरी 2024 के बीच 

1275 करोड़ की राजनीतिक फंडिंग की गई.

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए हलफनामे के मुताबिक अप्रैल 2019 से सितम्बर 2023 के बीच जनता दल (सेकुलर) को 50 करोड़ और डीएमके को 105 करोड़ की राजनीतिक फंडिंग की गई.

कोयम्बटूर में रजिस्टर्ड लोटरी कंपनी फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज ने वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 328 करोड़ रूपए दिए. इसी साल फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज बीजेपी को सीधे पांच करोड़ का फंड दिया. वित्तीय वर्ष 2021-22 में फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज ने इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से 544 करोड़ रूपए दिए.

वित्तीय वर्ष 2020-21 में कंपनी ने इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से 150 करोड़ रूपए की फंडिंग राजनीतिक दलों को की. इसी साल प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट को फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज ने 23 मार्च और 24 मार्च को 50-50 करोड़ रूपए दिए गए. अप्रैल 2019 से जनवरी 2024 के बीच फ्यूचर गेमिंग के खाते से इलेक्टोरल बॉन्ड, इलेक्टोरल ट्रस्ट और सीधी राजनीतिक फंडिंग मिलाकर 1405 करोड़ की मोटी राजनीतिक फंडिंग की गई. तमिलनाडु ने सत्ताधारी पार्टी डीएमके ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर बताया है कि अप्रैल 2019 से सितम्बर 2023 के बीच फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज की तरफ से उसे इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 509 करोड़ रूपए हासिल हुए.

 

हल्दिया एनर्जी लिमिटेड ने वित्तीय वर्ष 2021-22 में इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 115 करोड़ रूपए का चंदा राजनीतिक दलों को दिया गया. इसी साल प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए 15 करोड़ रूपए का चंदा दिया गया

वित्तीय वर्ष 2020-21 में हल्दिया एनर्जी लिमिटेड ने इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम ने 35 करोड़ रूपए का फंड दिया. इसी साल प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट के माध्यम से 25 करोड़ रूपए का चंदा दिया गया.

 

आदित्य बिड़ला ग्रुप ने साल 2019-20 में अल्ट्राटेक सीमेंट, ग्रेसिम, एस्सेल माइनिंग के खाते सेकुल 73 करोड़ रूपए के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे. इसी साल हिंडाल्को के खाते से आदित्य बिड़ला जनरल इलेक्टोरल ट्रस्ट में 10 करोड़ रूपए का योगदान दिया गया. इसमें से 9 करोड़ रूपए बीजेपी और एक करोड़ रुपया झारखंड मुक्ति मोर्चा के खाते में डाला गया. 2020-21 के दौरान आदित्य बिड़ला ग्रुप की एस्सेल माइनिंग ने 20 करोड़ के इलेक्टोरल बांड खरीदे. इसके अगले वित्तीय वर्ष 2021-22 में एस्सेल माइनिंग के खाते से 104. 5 करोड़ के इलेक्टोरल बांड ख़रीदे गए. दूसरी तरफ हिंडाल्को के मार्फ़त 10 करोड़ का योगदान आदित्य बिड़ला जनरल इलेक्टोरल ट्रस्ट में डाले गए. ये दस करोड़ रुपया सत्ताधारी पार्टी बीजेपी को चंदे के रूप में दे दिया गया. वित्तीय वर्ष 2022-23 में आदित्य बिड़ला ग्रुप की कंपनी बिड़ला कार्बन के जरिए 55 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे गए. इसी वित्तीय वर्ष में एस्सेल माइनिंग के खाते से 50 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड की खरीददारी हुई. कुल मिलकर अप्रैल 2019 से मार्च 2023 के बीच आदित्य बिड़ला ग्रुप ने कुल 322.5 करोड़ रूपए का चंदा दिया गया. इसमें से 302 करोड़ रूपए की राजनीतिक फंडिंग इलेक्टोरल बॉन्ड के मार्फ़त हुई

 

स्टील जाइंट लक्ष्मी मित्तल ने अपने खाते से 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 35 करोड़ रूपए के इलेक्टोरल बॉन्ड ख़रीदे. मित्तल के स्वामित्व वाली कंपनियों आर्सेलर मित्तल निप्पन स्टील और आर्सेलर मित्तल डिजाइन के खाते से प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट में करोड़ों का योगदान दिया गया. वित्तीय वर्ष 2022-23 में मित्तल ग्रुप की इन दो कंपनियों ने मिलकर 100 करोड़ का योगदान दिया. वहीं वित्तीय वर्ष 2021-22130 करोड़ रूपए प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट के खाते में डाले गए.

 

फार्मा और पॉवर क्षेत्र में काम करने वाले टोरेंट ग्रुप ने भी वित्तीय वर्ष 2021-22 में 45 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे. इसी साल प्रूडेंट इलेक्टोरल फंड के जरिए 3.5 करोड़ रूपए राजनीतिक दलों को बतौर चन्दा दिया गए.

वित्तीय वर्ष 2020-21 में टोरेंट ग्रुप ने प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट में 20 करोड़ का योगदान दिया. इस साल यह ग्रुप पीएम केयर्स फंड में 100 करोड़ रूपए का योगदान देने के चलते चर्चा में रहा था

 

ओपी जिंदल ग्रुप ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान साढ़े सात करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे गए

इस साल जिंदल ग्रुप ने अपने इलेक्टोरल ट्रस्ट जन कल्याण इलेक्टोरल ट्रस्ट के मार्फत 72 करोड़ का चंदा अलग-अलग राजनीतिक दलों को दिया गया. ट्रस्ट के खाते से 25 करोड़ रूपए कांग्रेस और 46 करोड़ रूपए बीजेपी को बतौर चंदा दिया गया. वित्तीय वर्ष 2020-21 में ओपी जिंदल ग्रुप की कंपनी जिंदल स्टेनलैस ने 20 करोड़, और जिंदल स्टील एंड पॉवर ने 25 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे. जिंदल हाउस की तरफ से भी पांच करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड की खरीददारी हुई. इसी साल जिंदल स्टील एंड पॉवर ने प्रूडेंट इलेक्टोरल बॉन्ड में 13 करोड़ रूपए का योगदान दिया.

 

चुनावी ट्रस्ट और चुनावी बांड के डाटा का मिलान करने के बाद हमारे सामने राजनीतिक फंडिंग की पूरी तस्स्वीर साफ़ होती है. 

अब आपसे से सवाल है कि कॉर्पोरेट और राजनीतिक हितों की परदे की पीछे ऐसा फूहड़ जुगलबंदी के सामने आने बाद आपका इस लोकतंत्र में कितना भरोसा बचा है?

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