बरेली के बभिया गांव में सांड का तांडव:बुजुर्ग किसान को पटक-पटक कर मार डाला, बचाने दौड़े चार ग्रामीणों को भी सींगों से मार कर किया लहुलुहान
February 19, 2026 | Uttar Pradesh
बरेली जनपद में आवारा पशुओं का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला कैंट थाना क्षेत्र के गांव बभिया का है, जहां बुधवार तड़के एक हिंसक सांड ने कोहराम मचा दिया। सांड के हमले में 70 वर्षीय बुजुर्ग किसान रामफेर पाराशर की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उन्हें बचाने आए चार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना के बाद से ग्रामीणों में नगर निगम और प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। शौच के लिए निकले थे बुजुर्ग, सांड ने सींगों पर उठा लिया घटना बुधवार सुबह करीब 5 से 6 बजे के बीच की है। गांव के रहने वाले 70 वर्षीय रामफेर पाराशर रोजाना की तरह सुबह शौच के लिए खेत की तरफ जा रहे थे। रास्ते में घात लगाए बैठे एक छुट्टा सांड ने उन पर अचानक हमला बोल दिया। सांड इतना हिंसक था कि उसने बुजुर्ग को सींगों पर उठाकर कई बार जमीन पर पटका। रामफेर की चीख-पुकार सुनकर जब तक ग्रामीण मौके पर पहुंचे, तब तक वह लहूलुहान होकर बेहोश हो चुके थे। बचाने आए ग्रामीणों पर भी किया जानलेवा हमला रामफेर को बचाने के लिए गांव के ही अमित, रीना, विद्यावती और राकेश की पत्नी दौड़कर आए। लेकिन पागल हो चुके सांड ने उन पर भी हमला कर दिया। सांड ने बारी-बारी से चारों को टक्कर मारकर घायल कर दिया। गांव में मची चीख-पुकार के बाद भारी संख्या में लोग डंडे और लाठियां लेकर पहुंचे, तब कहीं जाकर सांड वहां से भागा। आनन-फानन में रामफेर को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अन्य घायलों का उपचार अस्पताल में चल रहा है। तीन भाइयों में सबसे बड़े थे अविवाहित रामफेर मृतक रामफेर पाराशर तीन भाइयों में सबसे बड़े थे और उन्होंने शादी नहीं की थी। वह अपने भाइयों के परिवार के साथ ही रहते थे। उनकी मौत की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया है। सूचना पर पहुंची कैंट थाना पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि आवारा पशुओं की समस्या को लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। रेस्क्यू टीम ने सांड को किया बेहोश, गौशाला भेजा घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत पशु चिकित्सकों और वन विभाग की टीम को मौके पर भेजा। हिंसक हो चुके सांड को काबू करना आसान नहीं था, इसलिए डॉक्टरों की टीम ने उसे 'ट्रैंक्विलाइजर गन' से बेहोश किया। इसके बाद भारी मशक्कत के बाद सांड को चौबारी स्थित गौशाला भिजवाया गया। गांव वालों में अभी भी दहशत है कि कहीं अन्य आवारा पशु भी इसी तरह हिंसक न हो जाएं।