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बंगाल SIR-पहचान सत्यापन में एडमिट कार्ड अकेले मान्य नहीं:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- साथ में 8वीं-10वीं की मार्कशीट होना भी जरूरी
TLN
Editorial Team
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान 10वीं या माध्यमिक परीक्षा का एडमिट कार्ड अकेले पहचान के रूप में मान्य नहीं होगा। इसे सिर्फ सहायक (पूरक) दस्तावेज माना जाएगा। एडमिट कार्ड तभी मान्य होगा जब उसके साथ मार्कशीट भी दी जाए। सीनीयर एडवोकेट डीएस नायडू ने सुप्रीम कोर्ट के सामने मामला उठाते हुए पूछा था कि क्या क्लास 8वीं की परीक्षा का एडमिट कार्ड अपने आप में पहचान पत्र रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि क्लास 8वीं की मार्कशीट पहचान सत्यापन के लिए मान्य दस्तावेजों में शामिल है। एडमिट कार्ड सिर्फ उसी की पुष्टि के लिए जोड़ा जा सकता है। एडमिट कार्ड सिर्फ सहायक कागज है, यह अकेले पहचान का आधार नहीं बन सकता। पश्चिम बंगाल समेत 12 राज्यों में SIR के फेज 2 के तहत वोटर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया जारी है। यहां पर 28 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश होगी। बंगाल में प्रक्रिया के दौरान राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच खींचतान चल रही है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट मामले पर सुनवाई कर रहा है। अधूरे दस्तावेज 26 फवरी की शाम तक जमा करने का निर्देश कोर्ट ने 24 फरवरी 2026 के अपने आदेश का हवाला देते हुए कहा कि जो दस्तावेज अभी तक अपलोड नहीं हुए हैं और 15 फरवरी से पहले मिले थे, उन्हें संबंधित ईआरओ और एईआरओ गुरुवार शाम 5 बजे तक न्यायिक अधिकारियों के सामने पेश करें। पास प्रमाणपत्र के बिना एडमिट कार्ड मान्य नहीं कोर्ट ने कहा कि जन्मतिथि और पिता का नाम साबित करने के लिए मार्कशीट के साथ एडमिट कार्ड दिया जा सकता है। लेकिन एडमिट कार्ड अकेले मान्य नहीं होगा। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि जिन लोगों ने परीक्षा नहीं दी या पास नहीं की, उनके पास भी एडमिट कार्ड हो सकता है। इस पर कोर्ट ने साफ किया कि एडमिट कार्ड तभी मान्य होगा, जब उसके साथ पास प्रमाणपत्र भी हो। बंगाल SIR से जुड़ी पिछली सुनवाई- 24 फरवरी: ओडिशा-झारखंड के सिविल जज करेंगे वेरिफिकेशन में मदद, SC बोला- इनका खर्च चुनाव आयोग उठाए सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया में सामने आए 80 लाख क्लेम निपटाने के लिए 2 राज्यों से सिविल जजों को तैनात करने की परमिशन दे दी है। कोर्ट ने आदेश दिया कि कलकत्ता हाईकोर्ट पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट SIR प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए झारखंड-ओडिशा के सिविल जजों की मदद ले सकता है। पूरी खबर पढ़ें… 20 फरवरी: राज्य सरकार और आयोग में भरोसे की कमी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- राज्य सरकार और आयोग के बीच विश्वास की कमी है। SIR ड्राफ्ट रोल से जुड़े दावे और आपत्तियों का निपटारा और निगरानी हाईकोर्ट की ओर से अपॉइंट अफसर और जज करेंगे। इसके लिए प्रक्रिया में सहयोग के लिए मौजूदा और पूर्व जिला जज को तैनात करने को कहा।पढ़ें पूरी खबर… 9 फरवरी: SIR में कोई रुकावट नहीं आने देंगे सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR प्रक्रिया में किसी भी तरह की रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह बात सभी राज्यों के लिए है। जरूरत पड़ने पर आदेश जारी किए जाएंगे। EC ने कोर्ट में एफिडेविट दाखिल कर आरोप लगाया था कि कुछ बदमाशों ने बंगाल में SIR से जुड़े नोटिस जला दिए और अब तक इस मामले में कोई FIR नहीं हुई। कोर्ट ने बंगाल के DGP से जवाब मांगा है। DGP से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। पूरी खबर पढ़ें… 4 फरवरी: ममता बोलीं- EC बंगाल को निशाना बना रहा ममता ने कोर्ट में कहा था कि चुनाव से पहले 2 महीने में ऐसा कुछ करने की कोशिश की जा रही है, जो 2 साल में होना था। खेतीबाड़ी के मौसम में लोगों को परेशान किया जा रहा है। 24 साल बाद इसे 3 महीने में पूरा करने की जल्दबाजी क्यों है। 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गई है। ECI की प्रताड़ना के चलते BLO की जान जा रही है। उन्होंने कहा कि बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। असम और नॉर्थ ईस्ट में ऐसा क्यों नहीं हो रहा। पूरी खबर पढ़ें… 28 जनवरी : ममता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी ममता बनर्जी ने 28 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को इस मामले में पक्षकार बनाया है। इससे पहले उन्होंने 3 जनवरी को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर SIR को मनमाना और त्रुटिपूर्ण बताते हुए रोकने की मांग की थी।
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