उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के संचालन को और अधिक सुव्यवस्थित और राजस्व केंद्रित बनाने के लिए अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता निगम के प्रबंध निदेशक प्रभु एन सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की। इसमें निगम मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी और सभी क्षेत्रों के क्षेत्रीय प्रबंधक शामिल हुए। बैठक में विभागीय प्रगति, बस संचालन व्यवस्था, समयपालन, जांच प्रणाली और यात्री सुविधाओं से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की विस्तृत समीक्षा की गई। समय-सारिणी के अनुसार संचालन पर जोर प्रबंध निदेशक ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी बसों का संचालन निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि समयपालन से यात्रियों का भरोसा बढ़ता है और निगम की छवि मजबूत होती है। उन्होंने क्षेत्रीय प्रबंधकों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में बसों की नियमित मॉनिटरिंग करें और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए। हर निर्धारित स्टॉप पर बस रोकना अनिवार्य एमडी प्रभु एन. सिंह ने सभी चालकों और परिचालकों को निर्देशित किया कि बस को प्रत्येक निर्धारित स्टॉप पर अनिवार्य रूप से रोका जाए। किसी भी स्थिति में स्टॉप को छोड़ा न जाए। उन्होंने कहा कि यात्रियों को उनके गंतव्य तक सुरक्षित और सुविधाजनक ढंग से पहुंचाना निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी है। स्टॉप छोड़ने से जहां यात्रियों को परेशानी होती है, वहीं निगम को संभावित राजस्व हानि भी उठानी पड़ती है। इसलिए प्रत्येक स्टॉप पर बस रोककर यात्रियों को बैठाना सुनिश्चित किया जाए। दिन-रात प्रभावी जांच व्यवस्था के निर्देश बैठक में जांच व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर भी जोर दिया गया। प्रबंध निदेशक ने निर्देश दिए कि समस्त जांच स्कॉड दल दिन और रात दोनों समय प्रभावी जांच व्यवस्था सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि बिना टिकट यात्रा, अनियमित संचालन और अन्य वित्तीय अनियमितताओं पर सख्ती से अंकुश लगाया जाए। नियमित और औचक जांच के माध्यम से राजस्व की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। निगम की आय में निरंतर वृद्धि पर फोकस एमडी ने स्पष्ट किया कि निगम की आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करना प्राथमिक लक्ष्य है। इसके लिए संचालन में पारदर्शिता, समयपालन, पूर्ण टिकटिंग और प्रभावी जांच तंत्र आवश्यक है। उन्होंने सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में राजस्व वृद्धि के लिए ठोस रणनीति बनाएं और उसकी नियमित समीक्षा करें। बैठक के अंत में यह दोहराया गया कि यात्रियों की सुविधा, संचालन की पारदर्शिता और राजस्व वृद्धि- इन तीनों बिंदुओं को केंद्र में रखकर कार्य किया जाए, ताकि परिवहन निगम की सेवा गुणवत्ता और वित्तीय स्थिति दोनों में सुधार सुनिश्चित हो सके।