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यह बहुत गंभीर मामला है भारत की विदेश नीति और खुफिया तंत्र पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है

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यह बहुत गंभीर मामला है  भारत की विदेश नीति और खुफिया तंत्र पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है

यह बहुत गंभीर मामला है 


👉 भारत की विदेश नीति और खुफिया तंत्र पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है


▪️ प्रधानमंत्री मोदी की हालिया इज़राइल यात्रा यह साबित करती है कि सरकार बेसुध है, पूरी तरह से बेख़बर


▪️ 25 फरवरी 2026 को हमले से ठीक कुछ दिन पहले PM मोदी इज़राइल गए, उन्होंने नेशनल (Knesset) को संबोधित किया, बेंजामिन नेतन्याहू के साथ खूब गलबहियाँ की 


▪️ उन्हें "स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल" स्वीकार करने के लिए आमंत्रित किया गया था - यह पुरस्कार ना उनसे पहले ना उनके बाद में किसी को दिया गया


▪️ यह ठीक वैसा ही पुरस्कार है जैसा 2019 में उनको मिला "फिलिप कोटलर प्रेसिडेंशियल अवॉर्ड" था जो ना उनसे पहले ना उनके बाद कभी किसी को दिया गया


▪️ यह विदेश नीति की बहुत बड़ी चूक है. इससे भारत या तो इज़राइल के साथ सलंग्न दिखता है या पूरी तरह से बेखबर


▪️ अब रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं कि इज़राइल ने मोदी को तब आमंत्रित किया था जब वह अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर हमले की योजना बना रहा था - मतलब नेतन्याहू ने मोदी की यात्रा का इस्तेमाल हमले की अंतिम तैयारी पर पर्दा डालने के लिए किया 


👉 क्या हमारी कूटनीतिक और खुफिया एजेंसियां इतनी बेकार हैं? 


👉 कैसे इतने बड़े हमले की योजना के बारे हमें कोई जानकारी नहीं थी? कोई चेतावनी, नहीं?


👉 क्या RAW, IB, MEA को आगामी हमले के बारे में कोई भनक नहीं लगी? कोई advisory क्यों नहीं आई? कोई योजना क्यों नहीं बनाई गई? क्या किसी ने सोचा कि इस सबका हमारे ईरान के साथ संबंधों पर कैसे पड़ेगा - हमारी ऊर्जा सुरक्षा पर, चाबहार बंदरगाह पर, INSTC पर क्या होगा?


ऐसा तब होता है जब गंभीर कूटनीति के बजाय केवल दिखावे, फोटो-ऑप्स और लपक लपक के गले लगने को प्राथमिकता दी जाती है

ये काम की प्रवक्ता सुप्रिया ने अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर करते हुए कहा है..

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