यह खबर हाल ही में (9 फरवरी 2026 को) सामने आई है, मुख्य रूप से The Indian Express की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से। इसमें बताया गया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने लोकसभा सचिवालय को सूचित किया है कि PM CARES Fund, Prime Minister’s National Relief Fund (PMNRF) और National Defence Fund (NDF) से संबंधित संसदीय सवाल या मामले लोकसभा में अनुमेय (admissible) नहीं हैं।
यह निर्देश 30 जनवरी 2026 को दिया गया था। PMO ने लोकसभा की प्रक्रिया और व्यवहार के नियमों के Rule 41(2)(viii) और Rule 41(2)(xvii) का हवाला दिया है। इन नियमों के अनुसार:
ऐसे सवाल नहीं पूछे जा सकते जो मुख्य रूप से भारत सरकार की चिंता न हों (not primarily the concern of the Government of India)।
या वे निकायों/व्यक्तियों से संबंधित हों जो सरकार के प्रति सीधे जवाबदेह न हों।
PMO का तर्क है कि ये तीनों फंड पूरी तरह सार्वजनिक स्वैच्छिक योगदानों (voluntary public contributions) से बने हैं, इनमें Consolidated Fund of India से कोई सरकारी आवंटन नहीं होता। इसलिए ये सरकार के सीधे नियंत्रण या जवाबदेही के दायरे से बाहर माने जाते हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे संसद का अपमान, सांसदों के अधिकारों पर हमला और तानाशाही करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि PMO अब तय कर रहा है कि सांसद क्या सवाल पूछ सकते हैं या नहीं।
कई रिपोर्ट्स में इसे पारदर्शिता की कमी से जोड़ा गया है, क्योंकि PM CARES जैसे फंड में करोड़ों का योगदान आया था (खासकर COVID के दौरान), लेकिन RTI और संसदीय जवाबदेही पर पहले से ही विवाद रहा है।
खर्च दिखाने में डर?
पैसे जनता से आए हैं, तो जवाबदेही क्यों नहीं? PMO का स्टैंड यह है कि ये ट्रस्ट/फंड सरकारी बजट का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए संसद में सामान्य सवालों का दायरा इन पर लागू नहीं होता। लेकिन आलोचक कहते हैं कि प्रधानमंत्री खुद चेयरपर्सन हैं, मंत्रियों की ट्रस्टी हैं, और PMO में ही प्रशासन होता है—तो प्रभावी रूप से सरकारी नियंत्रण है, लेकिन जवाबदेही से बचाव..