ये नियम उत्तर प्रदेश मोटरयान (समूहक और वितरण सेवा प्रदाता) नियमावली, 2026 के तहत आए हैं, जो मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 93 और केंद्र सरकार के 1 जुलाई 2025 के संशोधित गाइडलाइंस पर आधारित हैं।
ये नियम सिर्फ कमर्शियल ऐग्रीगेटर प्लेटफॉर्म्स (ride-hailing apps) और उनके वाहनों पर लागू होते हैं—सामान्य प्राइवेट कारों, पर्सनल वाहनों या गैर-कमर्शियल इस्तेमाल पर नहीं। उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना, ड्राइवरों की जांच सख्त करना, और इन सेवाओं पर नियंत्रण लाना है, क्योंकि पहले इन पर कोई राज्य-स्तरीय रेगुलेशन नहीं था।
मुख्य नियम और बदलाव (विस्तार से):
प्लेटफॉर्म/कंपनी का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन:
Ola, Uber जैसी सभी ऐग्रीगेटर कंपनियों को उत्तर प्रदेश ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में रजिस्टर होना अनिवार्य है।
बिना रजिस्ट्रेशन के राज्य में कोई सेवा नहीं चला सकेंगे।
आवेदन शुल्क: ₹25,000।
लाइसेंस फीस: 50 या इससे ज्यादा वाहनों वाली कंपनियों के लिए ₹5 लाख (कुछ रिपोर्ट्स में 50-100+ वाहनों के लिए)।
लाइसेंस 5 साल के लिए वैध होगा।
नवीनीकरण शुल्क: ₹5,000 हर 5 साल में।
वाहनों और ड्राइवरों पर सख्त शर्तें:
हर कैब/वाहन को फिटनेस सर्टिफिकेट (वाहन की फिटनेस जांच) होना जरूरी।
ड्राइवर का मेडिकल जांच/टेस्ट अनिवार्य (स्वास्थ्य प्रमाणपत्र)।
ड्राइवर की पुलिस वेरिफिकेशन (पुलिस सत्यापन) जरूरी।
बिना इन सबके कोई भी वाहन ऐप पर ऑपरेट नहीं कर सकेगा।
अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान:
राइड कैंसिलेशन पर नियम: ड्राइवर बिना वैध कारण बताए राइड कैंसिल नहीं कर सकता—अगर करता है तो कुल किराए का 10% कटौती होगी।
यात्री अगर बिना वजह कैंसिल करता है तो किराए का 10% या अधिकतम ₹100 तक अगली बुकिंग में कट सकता है।
महिलाओं की सुरक्षा: ऐप में महिला ड्राइवर का विकल्प देने की योजना।
सरकार एक नया परिवहन ऐप विकसित करेगी, जिसमें ड्राइवर और वाहन की पूरी जानकारी पब्लिक होगी—यात्रियों को आसानी से चेक करने का मौका मिलेगा।
ये नियम डिलीवरी सर्विस प्रदाताओं (जैसे Zomato, Swiggy आदि के वाहन) पर भी लागू हो सकते हैं।
कब से लागू होगा?
कैबिनेट ने मंजूरी दी है, लेकिन पूर्ण रूप से लागू होने के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी होना बाकी है।
प्रस्तावित नियमों पर 30 दिनों के अंदर आपत्तियां/सुझाव मांगे गए हैं (मार्च 2026 में जारी अधिसूचना के अनुसार)।
केंद्र के 2025 संशोधन को अपनाया जा रहा है, इसलिए जल्द ही पूरी तरह लागू हो जाएगा।
इसका असर क्या होगा?
यात्रियों के लिए सुरक्षा बढ़ेगी (बेहतर वेरिफिकेशन से क्राइम कम होने की उम्मीद)।
कंपनियों पर खर्च बढ़ेगा (फीस, जांच आदि), जिससे किराए में थोड़ा असर पड़ सकता है।
ड्राइवरों को ज्यादा दस्तावेज जमा करने पड़ेंगे, लेकिन नियमित कमाई वाली सेवा मिलेगी।
अवैध/बिना रजिस्ट्रेशन वाली कैबें बंद हो सकती हैं।
अगर आप आगरा (या यूपी के किसी शहर) में Ola/Uber यूज करते हैं, तो जल्द ही ऐप में कुछ बदलाव दिख सकते हैं—जैसे ज्यादा वेरिफिकेशन या कंपनियों की तरफ से नोटिस ।
लागू होने की स्थिति:
कैबिनेट ने 10 मार्च 2026 को मंजूरी दी।
परिवहन विभाग ने मसौदा (ड्राफ्ट) जारी कर दिया है।
30 दिनों के अंदर आम जनता, कंपनियां, स्टेकहोल्डर्स से आपत्तियां/सुझाव मांगे गए हैं (मार्च 2026 में जारी)।
आपत्तियां आने के बाद फाइनल नोटिफिकेशन जारी होगा, फिर पूरी तरह लागू हो जाएगा (जल्द ही, शायद अप्रैल-मई 2026 तक)।
अभी ये प्रस्तावित हैं, लेकिन कंपनियां तैयारी में लग गई हैं।
आगरा (या यूपी) में असर:
अगर आप आगरा में Ola/Uber यूज करते हैं, तो जल्द ही ऐप में बदलाव दिख सकते हैं—जैसे ज्यादा वेरिफिकेशन, ड्राइवर प्रोफाइल में फिटनेस/पुलिस वेरिफिकेशन बैज, या कंपनियों की तरफ से नोटिस।
अवैध/बिना लाइसेंस वाली कैबें बंद हो सकती हैं, जिससे सुरक्षित और रेगुलेटेड सर्विस मिलेगी।
किराए में थोड़ा बढ़ोतरी हो सकती है (कंपनियों के खर्च बढ़ने से), लेकिन सुरक्षा बढ़ेगी।